• चित्रकोट, सिरपुर, धार्मिक पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग पर जोर; 18 पर्यटन संपत्तियों के विकास में निजी भागीदारी से करीब ₹500 करोड़ निव...
• चित्रकोट, सिरपुर, धार्मिक पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग पर जोर; 18 पर्यटन संपत्तियों के विकास में निजी भागीदारी से करीब ₹500 करोड़ निवेश की तैयारी :
रायपुर : पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए सरकार दीर्घकालिक योजना के साथ काम कर रही है। नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने पर्यटन, संस्कृति और पुरातत्व विभाग की उपलब्धियों तथा आगामी योजनाओं की जानकारी दी।
मंत्री ने कहा कि चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपात, बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत तथा मां दंतेश्वरी और मां महामाया जैसे आस्था केंद्र छत्तीसगढ़ की बड़ी पर्यटन संपदा हैं। सरकार इन प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने पर जोर दे रही है।
पर्यटन में निजी निवेश को बढ़ावा
पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल की गई हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए ₹203.53 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब ₹350 करोड़ है।
61 ट्रेनों से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या-काशी दर्शन
श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया जा चुका है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या और काशी की यात्रा कर चुके हैं।
होमस्टे और स्थानीय रोजगार पर जोर
स्थानीय परिवारों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए होमस्टे और स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत हैं। पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
चित्रकोट और सिरपुर के विकास पर विशेष फोकस
चित्रकोट को केवल जलप्रपात तक सीमित न रखते हुए विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सिरपुर के विस्तृत पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम जारी है।
भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए भारत सरकार से ₹145.99 करोड़ की स्वीकृति मिली है। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।
डिजिटल पर्यटन को मिलेगा विस्तार
पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल सूचना और पर्यटन सुविधाओं को एकीकृत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से करीब ₹6.48 करोड़ और पर्यटन इकाइयों से लगभग ₹31.75 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने की जानकारी दी गई।
2028 तक नई पर्यटन पहचान का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश और दुनिया के सामने स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष ₹100 करोड़ के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे करीब ₹500 करोड़ का निवेश आकर्षित होने तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर बनने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगी छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग
इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों में भागीदारी, फिल्म एवं ओटीटी आधारित प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच और इंटरनेशनल इन्फ्लुएंसर फैम टूर जैसे प्रयास प्रस्तावित हैं।
कलाकारों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
मंत्री ने बताया कि कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब ₹30.03 लाख की सहायता दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को ₹15.30 लाख की सहायता दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को करीब ₹19.08 लाख की राशि प्रदान की गई। वहीं आर्थिक रूप से अभावग्रस्त 407 वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को ₹82.12 लाख की पेंशन दी गई है। वर्तमान वर्ष में अब तक 121 वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को योजना का लाभ मिला है।
प्रदेश में सूचीबद्ध 89 मेला-मड़ई, उत्सव और समारोहों का आयोजन किया जा रहा है। बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बस्तर पंडुम का आयोजन भी जारी है।
संस्कृति का डिजिटल आर्काइव और धरोहर संरक्षण
छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल आर्काइव तैयार किया जा रहा है। सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं को भी आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक आयोजनों के लिए ₹7.85 करोड़ से अधिक की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।
सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है। प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर काम चल रहा है।
महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में नई रियासत गैलरी और मौजूदा गैलरियों के उन्नयन की योजना है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
12 लाख पृष्ठों का डिजिटल अभिलेखीकरण
छत्तीसगढ़ से संबंधित करीब 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन्हें वेब अभिलेखागार पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराने हेतु कैटलॉग और मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है।
पुरातत्व विभाग के उत्खनन में रायपुर जिले के आरंग तहसील के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में लगभग 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण मिलने की जानकारी भी दी गई।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों या आयोजनों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना है।





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