छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत: ई-कार्ड से मिलेगा कैशलेस इलाज, मेडिकल बिल और रेफर की झंझट होगी खत्म रायपुर। छत...
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छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत: ई-कार्ड से मिलेगा कैशलेस इलाज, मेडिकल बिल और रेफर की झंझट होगी खत्मरायपुर। छत्तीसगढ़ के करीब पांच लाख शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार की प्रस्तावित कैशलेस चिकित्सा योजना का प्रारूप तैयार हो चुका है। योजना लागू होने के बाद कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से राशि खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी। ई-कार्ड के माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना किसी अग्रिम भुगतान के इलाज शुरू हो सकेगा, जबकि उपचार का पूरा भुगतान राज्य सरकार सीधे अस्पताल को करेगी।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना को अंतिम रूप देने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में मंत्रालय में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारी संगठनों के सुझावों पर भी विस्तार से विचार किया गया।
राजेश चटर्जी ने बताया कि नई व्यवस्था में कर्मचारियों को ई-कार्ड जारी किया जाएगा। अस्पताल में कार्ड का ऑनलाइन सत्यापन होते ही मरीज का इलाज तत्काल शुरू हो जाएगा। इससे कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले राशि जमा कराने या बाद में मेडिकल प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारी पहले इलाज का पूरा खर्च स्वयं वहन करते हैं और बाद में बिल जमा कर प्रतिपूर्ति प्राप्त करते हैं, जिसमें काफी समय और औपचारिकताएं लगती हैं।
नई कैशलेस चिकित्सा योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रेफरल (Refer) व्यवस्था को समाप्त करने का प्रस्ताव है। इससे कर्मचारी आवश्यकता पड़ने पर सीधे सूचीबद्ध अस्पताल में उपचार करा सकेंगे। इलाज का पूरा भुगतान ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) के माध्यम से सीधे अस्पतालों को किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने और अनावश्यक देरी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रिगर विश्लेषण तथा नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट (NAFU) के माध्यम से मेडिकल दावों की जांच की जाएगी। इससे फर्जी मेडिकल बिलों और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाने का प्रयास किया जाएगा।
राजेश चटर्जी ने यह भी बताया कि राज्य के पेंशनरों और अन्य पात्र हितग्राहियों को भी केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) की तर्ज पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया गया है। उनका कहना है कि यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने इस पहल को कर्मचारियों के लंबे समय से चले आ रहे एक महत्वपूर्ण सपने के साकार होने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री ****, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि योजना शीघ्र लागू होकर लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध

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