• नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष से लेकर शिक्षा, विकास और सांस्कृतिक जागरण तक केदार कश्यप के योगदान को बताया ऐतिहासिक : जगदलपुर : वन मंत्री केदार ...
• नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष से लेकर शिक्षा, विकास और सांस्कृतिक जागरण तक केदार कश्यप के योगदान को बताया ऐतिहासिक :
जगदलपुर : वन मंत्री केदार कश्यप के मंत्री के रूप में 17 वर्ष 9 माह का कार्यकाल पूर्ण होने पर जगदलपुर नगर निगम के महापौर संजय पांडे ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। महापौर ने कहा कि केदार कश्यप का लंबा राजनीतिक और मंत्री पद का कार्यकाल केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि बस्तर की सेवा, संघर्ष, विकास और सामाजिक जागरण की सशक्त यात्रा है।
महापौर संजय पांडे ने कहा कि जब बस्तर की पहचान नक्सलवाद, पिछड़ेपन और भय से जुड़ी हुई थी, तब केदार कश्यप ने बस्तर की सकारात्मक पहचान को देश के सामने रखने का काम किया। उन्होंने सत्ता में रहते हुए भी दूरस्थ गांवों और आमजन से अपना जुड़ाव बनाए रखा तथा क्षेत्र की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
धर्मांतरण के खिलाफ सामाजिक जागरण का अभियान
महापौर ने कहा कि बस्तर के आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को लेकर पैदा हुए भ्रम के बीच केदार कश्यप ने गांव-गांव जाकर समाज के बीच संवाद स्थापित किया। गणेशोत्सव, नवरात्रि, होली, दीपावली और रक्षाबंधन जैसे पर्वों के माध्यम से समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और धर्मांतरण के खिलाफ जनजागरण खड़ा करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि बस्तर में धर्मांतरण के खिलाफ सामाजिक चेतना खड़ी करने वाले प्रमुख नेताओं में केदार कश्यप का नाम अग्रणी है।
नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष, व्यक्तिगत पीड़ा के बावजूद नहीं झुके
महापौर संजय पांडे ने कहा कि केदार कश्यप ने उस दौर में नक्सलवाद के खिलाफ आवाज बुलंद की, जब बस्तर में नक्सली हिंसा और आतंक चरम पर था। व्यक्तिगत पीड़ा झेलने के बावजूद उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष जारी रखा और बस्तर में शांति, विकास तथा लोकतंत्र की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया।
महापौर ने कहा कि नक्सलियों द्वारा उनके भाई की हत्या के बाद भी केदार कश्यप ने हिंसा के सामने झुकने के बजाय बस्तर के बेहतर भविष्य के लिए अपना संघर्ष जारी रखा।
नारायणपुर में विकास को बनाया जवाब
महापौर ने कहा कि नारायणपुर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन विधायक के रूप में केदार कश्यप ने सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए। जहां नक्सलवाद विकास को रोकना चाहता था, वहां उन्होंने विकास को ही उसका जवाब बनाने का प्रयास किया।
शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शी सोच का परिणाम
महापौर पांडे ने कहा कि स्कूल शिक्षा मंत्री के रूप में केदार कश्यप के कार्यकाल को बस्तर की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के लिए याद किया जाएगा। नक्सली हिंसा के कारण बंद पड़े स्कूलों को पुनः शुरू करने, पोटा केबिन और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए गए।
उन्होंने कहा कि शिक्षाकर्मियों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए उनके नियमितीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
महापौर के अनुसार, आज सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे क्षेत्रों के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और अन्य प्रतिष्ठित क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। इसके पीछे शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने के लिए वर्षों से किए गए प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
बस्तर की प्रतिभाओं को मिला मंच
महापौर ने कहा कि केदार कश्यप ने खेल, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में बस्तर की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार प्रयास किए। स्थानीय युवाओं को मंच देने की सोच ने नई पीढ़ी में आत्मविश्वास पैदा किया।
उन्होंने कहा कि आज बस्तर केवल नक्सलवाद की खबरों के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, संस्कृति और विकास की संभावनाओं के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है।
बस्तर के विश्वास और विकास का कार्यकाल
महापौर संजय पांडे ने कहा कि 17 वर्ष 9 माह का मंत्री कार्यकाल अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस लंबे सफर में बस्तर की आवाज, अस्मिता और विकास को केंद्र में रखा गया।
उन्होंने कहा कि केदार कश्यप ने नक्सलवाद के आतंक के सामने लोकतंत्र का झंडा ऊंचा रखा, सामाजिक जागरण को मजबूती दी, शिक्षा के क्षेत्र में दूरगामी प्रयास किए और बस्तर की सकारात्मक पहचान को मजबूत किया।
महापौर ने वन मंत्री केदार कश्यप को उनके 17 वर्ष 9 माह के मंत्री कार्यकाल के लिए बधाई देते हुए स्वस्थ, सफल एवं दीर्घ राजनीतिक जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर के विकास और जनकल्याण की यात्रा में उनका अनुभव और मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा।


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