• उमाशंकर शुक्ला बोले, शीर्ष नक्सली कमांडरों की भूमिका की जांच जरूरी; केवल निचले कैडर को सजा देना पूर्ण न्याय नहीं : जगदलपुर : झीरम घाटी नर...
• उमाशंकर शुक्ला बोले, शीर्ष नक्सली कमांडरों की भूमिका की जांच जरूरी; केवल निचले कैडर को सजा देना पूर्ण न्याय नहीं :
जगदलपुर : झीरम घाटी नरसंहार मामले में विशेष एनआईए अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद कांग्रेस ने मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने कहा है कि झीरम नरसंहार के कथित मुख्य षड्यंत्रकारियों और शीर्ष नक्सली कमांडरों से पूछताछ किए बिना मामले में पूर्ण न्याय नहीं माना जा सकता।
जारी विज्ञप्ति में उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में हुआ नक्सली हमला भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दर्दनाक और भयावह घटनाओं में से एक था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार सहित कई लोगों की जान गई थी।
उन्होंने कहा कि हाल ही में एनआईए की विशेष अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। हालांकि, उनके अनुसार इस फैसले से झीरम हमले के पीछे कथित रूप से मौजूद व्यापक षड्यंत्र का पूरा सच सामने नहीं आया है।
उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि झीरम जैसी बड़ी घटना की योजना शीर्ष नक्सली नेतृत्व की मंजूरी के बिना संभव नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना के समय बस्तर और दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय रहे कुछ वरिष्ठ नक्सली कैडरों ने बाद में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया, लेकिन उनसे झीरम मामले में व्यापक पूछताछ नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके शीर्ष नक्सली कैडरों से पूछताछ कर उन्हें मामले में गवाह या आरोपी के रूप में शामिल करने की दिशा में गंभीरता से जांच की जानी चाहिए थी। इससे हमले की योजना, इसके पीछे के लोगों और पूरी साजिश के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती थी।
शुक्ला ने कहा कि जिन 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, वे कथित रूप से निचले स्तर के नक्सली कैडर या सहयोगी की भूमिका में हो सकते हैं। इसलिए केवल निचले स्तर के आरोपियों को सजा मिलने को पूर्ण न्याय नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने मांग की कि झीरम नरसंहार की पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए कथित मुख्य षड्यंत्रकारियों और उस समय सक्रिय शीर्ष नक्सली नेतृत्व की भूमिका की भी गहन जांच की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक घटना की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती और सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच नहीं होती, तब तक झीरम मामले का निर्णय अधूरा माना जाएगा।


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