• बादल एकेडमी में आयोजित प्रशिक्षण में करीब 200 कंटेंट क्रिएटर और मीडियाकर्मी हुए शामिल, स्थानीय भाषा, तथ्यपरकता, यूनिकनेस और जिम्मेदार रिपो...
• बादल एकेडमी में आयोजित प्रशिक्षण में करीब 200 कंटेंट क्रिएटर और मीडियाकर्मी हुए शामिल, स्थानीय भाषा, तथ्यपरकता, यूनिकनेस और जिम्मेदार रिपोर्टिंग पर जोर :
जगदलपुर : आसना स्थित बादल एकेडमी में बुधवार को बस्तर के नए सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। बस्तर जिला जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में द न्यूज पिंच के फाउंडिंग एडिटर अभिनव पांडेय ने कंटेंट क्रिएटर्स को न्यूज तैयार करने, डिजिटल मीडिया में प्रभावी ढंग से काम करने और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यशाला में बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 200 कंटेंट क्रिएटर और मीडियाकर्मी शामिल हुए। डिजिटल मीडिया के सामने आने वाली चुनौतियों, न्यूज कंटेंट तैयार करने की प्रक्रिया, तथ्यपरक खबरों की जरूरत और स्थानीय स्तर पर डिजिटल पत्रकारिता को मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अपनी भाषा में कंटेंट बनाने पर जोर
अभिनव पांडेय ने कहा कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को सही जानकारी, बेहतर प्रस्तुति और जिम्मेदार न्यूज रिपोर्टिंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कंटेंट में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और क्रिएटर्स को अपनी स्थानीय भाषा में कंटेंट तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पब्लिक की बात पब्लिक की भाषा में रखनी चाहिए। शब्दों में प्रभाव होना चाहिए, लेकिन भाषा में संयम भी जरूरी है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को पढ़ने के साथ-साथ अलग-अलग जगहों पर जाकर सीखने की सलाह दी।
यूनिकनेस और कंसिस्टेंसी को बताया सफलता की कुंजी
अभिनव पांडेय ने कहा कि कंटेंट क्रिएशन किसी भी विषय पर हो, लेकिन उसमें यूनिकनेस और कंसिस्टेंसी होना जरूरी है। उन्होंने नए क्रिएटर्स को छोटे स्तर से शुरुआत कर धीरे-धीरे अपना सर्किल बढ़ाने और अपने उद्देश्य के प्रति आत्मविश्वास बनाए रखने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि आलोचना को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। ट्रोल्स को जवाब देने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना बेहतर है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से दुनिया क्या कहेगी इसकी चिंता छोड़कर अपने काम के प्रति ललक और जुनून बनाए रखने की बात कही।
जनपक्षीय और कंस्ट्रक्टिव पत्रकारिता पर जोर
पत्रकारिता से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए अभिनव पांडेय ने कहा कि मीडिया को जनपक्षीय होना चाहिए। सही को सही और गलत को गलत कहने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने पत्रकारिता को कंस्ट्रक्टिव बनाने की आवश्यकता बताई और कॉपीराइट से बचने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यदि कंटेंट में मास अपील और प्रभाव पैदा करने की क्षमता होगी तो शॉर्ट और लॉन्ग दोनों तरह के वीडियो में दर्शक और सब्सक्राइबर जुड़ सकते हैं। लॉन्ग वीडियो से शॉर्ट वीडियो तैयार कर अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर साझा किए जा सकते हैं। उन्होंने क्रिएटर्स को वायरल और ट्रेंडिंग थीम को पहचानने की क्षमता विकसित करने की भी सलाह दी।
बस्तर के विकास की जानकारी पहुंचाने में कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका
अभिनव पांडेय ने कहा कि उग्रवाद मुक्त बस्तर के बाद अब यहां लोगों को नए सपने देखने की आजादी मिली है। बस्तर के सुदूर गांवों तक विकास की जानकारी पहुंचाने में स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी को बेहतर कंटेंट के माध्यम से दूर किया जा सकता है। बस्तर में नेचर, कल्चर और टूरिज्म सहित कई विषयों पर कंटेंट क्रिएशन की बड़ी संभावनाएं हैं।
पॉडकास्ट स्टूडियो की जानकारी दी
कार्यशाला में बस्तर जिला प्रशासन की ओर से युवाओं को डिजिटल कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में सहयोग देने के लिए स्थापित पॉडकास्ट स्टूडियो के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने स्टूडियो की स्थापना के उद्देश्य और आम लोगों के लिए इसके उपयोग से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी।
कार्यशाला में कंटेंट क्रिएटर्स ने न्यूज रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं एवं समस्याएं भी साझा कीं। प्रशिक्षण के दौरान स्थानीय घटनाओं को प्रभावी और जिम्मेदारी के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में जिला जनसंपर्क के संयुक्त संचालक कमल कुमार बघेल, उप संचालक चंद्रशेखर कश्यप, आसना एकेडमी के भरत गंगादित्य, अभिषेक सिंह ठाकुर सहित बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों से आए कंटेंट क्रिएटर और मीडियाकर्मी मौजूद रहे। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में संचालित पत्रकारिता पीजी डिप्लोमा सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने भी प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।






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