• धान, गेहूं, चावल और बांस से बना रहीं आकर्षक राखियां, स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल : जगदलपुर : रक्षाबंधन के पावन पर्व...
• धान, गेहूं, चावल और बांस से बना रहीं आकर्षक राखियां, स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल :
जगदलपुर : रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल और प्रेरणा से बस्तर जिले के बकावंड क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई मिसाल पेश कर रही हैं। आड़ावाल में छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद झरना और मोंगरा फूल स्व-सहायता समूह की 10 महिलाओं ने प्राकृतिक एवं पारंपरिक सामग्री से पर्यावरण-अनुकूल राखियां बनाने का काम शुरू किया है।
महिलाएं धान, गेहूं, चावल और बांस जैसी स्थानीय सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। इस कार्य में फरसीगांव और भेजरीपदर सहित आसपास के गांवों की महिलाएं भी उत्साहपूर्वक भाग ले रही हैं।
लगभग 5 हजार रुपये की शुरुआती लागत से शुरू हुए इस कार्य ने अब गति पकड़ ली है। समूह की महिलाएं प्रतिदिन औसतन 70 से 90 राखियां तैयार कर रही हैं। काम को व्यवस्थित रखने के लिए महिलाओं ने जिम्मेदारियां भी बांट ली हैं। कुछ सदस्य राखी निर्माण का काम संभाल रही हैं, जबकि अन्य महिलाएं जनपद पंचायत बकावंड और स्थानीय हाट-बाजारों में स्टॉल लगाकर राखियों की बिक्री कर रही हैं।
30 से 40 रुपये में बिक रही हस्तनिर्मित राखियां
बाजार में इन पर्यावरण-अनुकूल हस्तनिर्मित राखियों की कीमत 30 से 40 रुपये प्रति नग रखी गई है। स्थानीय स्तर पर इन्हें खरीदारों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। समूह की सदस्य पार्वती के अनुसार, अब तक 10 हजार रुपये से अधिक की राखियां बेची जा चुकी हैं। इससे शुरुआती लागत निकल चुकी है और समूह अब मुनाफे की ओर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री की पहल से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिलने के साथ ही स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को भी बाजार और नई पहचान मिल रही है। प्राकृतिक सामग्री से तैयार राखियों के माध्यम से महिलाएं आजीविका के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।


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