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सरकारी स्कूलों में अब अभिभावकों के हाथ होगी कमान, शिक्षकों की मनमानी पर लगेगा अंकुश

• नई विद्यालय प्रबंधन समिति में 75% सदस्य होंगे अभिभावक, स्कूल विकास और निगरानी की मिलेगी जिम्मेदारी : जगदलपुर : सरकारी स्कूलों में शिक्षा ...

नई विद्यालय प्रबंधन समिति में 75% सदस्य होंगे अभिभावक, स्कूल विकास और निगरानी की मिलेगी जिम्मेदारी :



जगदलपुर : सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी स्कूलों के संचालन और विकास में अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। समिति के 75 प्रतिशत सदस्य बच्चों के माता-पिता या अभिभावक होंगे, जबकि महिलाओं की भागीदारी कम से कम 50 प्रतिशत अनिवार्य रहेगी।

शिक्षा विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार कक्षा पहली से 12वीं तक के सभी सरकारी स्कूलों में नई विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा। समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के अभिभावकों को भी उनके अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव अभिभावकों में से होगा, जबकि स्कूल के प्राचार्य या प्रधानपाठक सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।

समिति के शेष 25 प्रतिशत सदस्यों में स्थानीय जनप्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षाविद, पूर्व छात्र तथा आंगनबाड़ी, आशा और एएनएम जैसी फ्रंटलाइन कार्यकर्ता शामिल होंगे। समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा और सदस्य सचिव को छोड़कर कोई भी सदस्य लगातार दो कार्यकाल तक पद पर नहीं रह सकेगा।

नई व्यवस्था के तहत समिति स्कूल के छोटे निर्माण एवं मरम्मत कार्यों, जैसे शौचालय, पेयजल, बिजली और पंखों की व्यवस्था पर एक लाख रुपये तक के कार्य स्वीकृत कर सकेगी। इसके अलावा 100 प्रतिशत नामांकन, ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी, तीन वर्षीय स्कूल विकास योजना तैयार करना, अभिभावक-शिक्षक बैठक, मध्यान्ह भोजन की निगरानी तथा स्कूल की मूलभूत सुविधाओं की देखरेख भी समिति की जिम्मेदारी होगी।

स्कूल खुलने के एक माह के भीतर नई समिति का गठन करना अनिवार्य होगा। पहली बैठक गठन के एक सप्ताह के भीतर आयोजित की जाएगी, जबकि हर महीने कम से कम एक बैठक करना भी अनिवार्य रहेगा।

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