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पर्यावरण के अनुकूल पत्तल में खाने के फायदे: स्वास्थ्य और प्रकृति के लिए वरदान

  पर्यावरण के अनुकूल पत्तल में खाने के फायदे: स्वास्थ्य और प्रकृति के लिए वरदान: भरतपुर: शादी का सीजन शुरू होते ही बाजारों में प्लास्टिक के ...

 पर्यावरण के अनुकूल पत्तल में खाने के फायदे: स्वास्थ्य और प्रकृति के लिए वरदान:

भरतपुर: शादी का सीजन शुरू होते ही बाजारों में प्लास्टिक के डिस्पोजल बर्तनों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन अब विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् पत्तल और मिट्टी के कुल्हड़ के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। यह न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित होता है।

प्राकृतिक बर्तनों का महत्व:

पत्तल और कुल्हड़ का उपयोग भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से होता आ रहा है। वैदिक ग्रंथों और आयुर्वेद में भी इनके फायदों का जिक्र किया गया है। पत्तल, जो आमतौर पर साल या केले के पत्तों से बनाए जाते हैं, में खाने से भोजन की पौष्टिकता बनी रहती है और कोई हानिकारक रसायन नहीं मिलते। वहीं, मिट्टी के कुल्हड़ में चाय या अन्य पेय पीने से मिट्टी के प्राकृतिक तत्व शरीर को लाभ पहुंचाते हैं।


पर्यावरण के लिए फायदेमंद:

प्लास्टिक के बर्तन न केवल मिट्टी और जल को प्रदूषित करते हैं, बल्कि इनके नष्ट होने में सैकड़ों साल लग जाते हैं। इसके विपरीत, पत्तल और कुल्हड़ पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल होते हैं और कुछ ही दिनों में प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाते हैं। इससे प्लास्टिक कचरे की समस्या भी कम होती है।


स्वास्थ्य पर प्रभाव:

रसायन मुक्त: प्लास्टिक के बर्तनों में केमिकल होते हैं, जो गर्म भोजन के संपर्क में आने पर हानिकारक तत्व छोड़ सकते हैं। पत्तल और कुल्हड़ पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं और इनमें कोई रसायन नहीं होते।

एंटी-बैक्टीरियल गुण: साल और केले के पत्तों में प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिससे इनमें खाना सुरक्षित रहता है।

पाचन में सहायक: मिट्टी के कुल्हड़ में पीने से मिट्टी के तत्व शरीर को मिनरल्स प्रदान करते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं।


समाज और परंपरा को संजोने की पहल:

आजकल कई शादी समारोह और सामूहिक भोज में फिर से पारंपरिक बर्तनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को फायदा हो रहा है, बल्कि स्थानीय कारीगरों को भी रोजगार मिल रहा है।


निष्कर्ष:

पत्तल और कुल्हड़ का उपयोग आधुनिक दौर में एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है। यह न केवल प्रकृति की रक्षा करता है, बल्कि हमारी सेहत और संस्कृति को भी संजोता है। इस शादी सीजन में प्लास्टिक को छोड़कर पत्तल और कुल्हड़ अपनाने का संकल्प लें और अपने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।






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