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बालोद में परेतिन माता का अनोखा मंदिर: यदुवंशी चढ़ाते हैं दूध, नहीं चढ़ाने पर फट जाता है

  बालोद में परेतिन माता का अनोखा मंदिर: यदुवंशी चढ़ाते हैं दूध, नहीं चढ़ाने पर फट जाता है: छत्तीसगढ़ : के बालोद जिले में एक अनोखी परंपरा सद...

 बालोद में परेतिन माता का अनोखा मंदिर: यदुवंशी चढ़ाते हैं दूध, नहीं चढ़ाने पर फट जाता है:

छत्तीसगढ़ : के बालोद जिले में एक अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है। झिंका गांव में स्थित परेतिन दाई माता के मंदिर में स्थानीय लोग विशेष आस्था रखते हैं। मान्यता है कि माता की पूजा करने से संतान सुख प्राप्त होता है। खास बात यह है कि गांव के यदुवंशी समुदाय के लोग प्रतिदिन माता को दूध अर्पित करते हैं, और यदि ऐसा न किया जाए तो दूध अपने आप फट जाता है।

सदियों पुरानी परंपरा:

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। मंदिर में हर दिन श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं और माता को दूध चढ़ाते हैं। कई लोगों का कहना है कि जिन्होंने इस परंपरा की अवहेलना की, उन्हें दूध फटने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा। यह घटना गांववालों के लिए आस्था और रहस्य का मिश्रण बनी हुई है।


संतान प्राप्ति के लिए होती है पूजा:

इस मंदिर में विशेष रूप से संतान सुख के लिए पूजा की जाती है। श्रद्धालु यहां आकर माता से मन्नत मांगते हैं और संतान प्राप्ति होने पर माता के चरणों में विशेष भेंट चढ़ाते हैं।


वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

कुछ लोगों का मानना है कि यह परंपरा श्रद्धा से जुड़ी हुई है, वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से इसे दूध की गुणवत्ता या जलवायु के प्रभाव से भी जोड़ा जाता है। लेकिन स्थानीय लोगों की अटूट आस्था इसे एक चमत्कारिक घटना मानती है।


गांववालों की गहरी श्रद्धा:

झिंका गांव के लोग परेतिन माता के मंदिर को अपनी सांस्कृतिक विरासत मानते हैं। मंदिर में प्रतिवर्ष विशेष पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।

यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अनूठी परंपराओं और मान्यताओं का भी प्रतीक है, जो इसे छत्तीसगढ़ के रहस्यमयी स्थलों में खास बनाता है।






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