जगदलपुर- में नगरीय निकाय चुनावों के लिए आरक्षण सूची जारी होने के बाद ओबीसी वर्ग में भारी असंतोष व्याप्त है। बस्तर संभाग ओबीसी म...
- Advertisement -
![]()
जगदलपुर- में नगरीय निकाय चुनावों के लिए आरक्षण सूची जारी होने के बाद ओबीसी वर्ग में भारी असंतोष व्याप्त है। बस्तर संभाग ओबीसी महासभा ने इसे वर्ग के राजनीतिक अधिकारों का हनन बताते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है। 23 दिसंबर 2024 को महासभा के सदस्यों ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में भारी संख्या में उपस्थित होकर कलेक्टर हरीश एस को ज्ञापन सौंपा।
आरक्षण घटने से असंतोष
महासभा के संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदु ने बताया कि 2014 और 2019 में परिसीमन के पश्चात अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 12 वार्ड आरक्षित किए गए थे। हालांकि, 20 दिसंबर 2024 को जारी नई आरक्षण सूची में यह संख्या घटकर 9 रह गई है। महासभा ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे ओबीसी वर्ग के अधिकारों और समुचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रहार बताया है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि पूर्व की तरह ओबीसी वर्ग के लिए 12 वार्ड आरक्षित किए जाएं। इनमें से 4 वार्ड महिलाओं के लिए सुरक्षित रखने की मांग की गई है। महासभा ने स्पष्ट किया कि आरक्षण की संख्या में कमी से ओबीसी वर्ग के हित प्रभावित होंगे और उनकी राजनीतिक भागीदारी कमजोर होगी।
सामाजिक और राजनीतिक असर
यह मुद्दा केवल ओबीसी वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न राजनीतिक दल भी इस आरक्षण में कमी पर अपनी असहमति व्यक्त कर चुके हैं। ओबीसी वर्ग के सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को उनका उचित हक दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
ओबीसी महासभा का तर्क
ओबीसी महासभा का कहना है कि आरक्षण घटाने से सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है। पहले आरक्षण की संख्या 12 होने से ओबीसी वर्ग का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता था, लेकिन अब यह संख्या कम होने से उनके अधिकारों का हनन हो रहा है। महासभा ने राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और आरक्षण को पुनः 12 वार्ड करने की अपील की है।
भविष्य की रणनीति
महासभा ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। इसके लिए जिले के ओबीसी वर्ग के लोगों को संगठित किया जाएगा। महासभा ने राजनीतिक दलों से भी अपील की है कि वे इस मुद्दे पर उनके साथ खड़े हों।
निष्कर्ष
जगदलपुर में आरक्षण को लेकर ओबीसी वर्ग का विरोध उनकी राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों की लड़ाई को दर्शाता है। यह मुद्दा आने वाले समय में नगरीय निकाय चुनावों के परिणामों और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। ओबीसी महासभा के विरोध ने सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
कोई टिप्पणी नहीं