1 नवंबर 2026 | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 31 अक्टूबर 2026 को नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वज-स्तंभ पूजन और ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुई...
1 नवंबर 2026 | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 31 अक्टूबर 2026 को नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वज-स्तंभ पूजन और ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुईं। उन्होंने संबोधन में आस्था, विरासत और स्वच्छता पर बात की।

- राष्ट्रपति मुर्मु 31 अक्टूबर 2026 को नासिक में ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुईं
- कुंभ मेलों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का जीवंत प्रमाण बताया
- पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के लिए जनभागीदारी का आग्रह किया
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 31 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वज-स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम को भी संबोधित किया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि नासिक-त्र्यम्बकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ की परंपरा प्राचीन और समृद्ध है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में गंगा तट, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम, उज्जैन में शिप्रा नदी तट और नासिक में गोदावरी तट पर होने वाले कुंभ समागम पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। उनके अनुसार इनका निरंतर आयोजन देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परंपराओं की शक्ति को दर्शाता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि कुंभ मेलों में असंख्य श्रद्धालुओं का एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता तथा परंपराओं की निरंतरता का जीवंत प्रमाण है। ये मेले आस्था और सामाजिक समरसता के उदाहरण पेश करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 प्राचीन विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ेगा। उन्होंने आशा जताई कि यह आयोजन युवा पीढ़ी को भारत की विरासत और प्रमुख जीवन-मूल्यों से जोड़ने का अच्छा अवसर बनेगा।
राष्ट्रपति ने मौसम से जुड़ी प्रतिकूल परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में लोग संकटों का सामना कर रहे हैं। देश में महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति से बहुत से लोग प्रभावित हुए हैं, विशेषकर किसान। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार इन समस्याओं से निपटने में, खासकर किसानों की सहायता के लिए, प्रयासरत हैं।
स्वच्छता और पर्यावरण के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने सभी देशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से निरंतर प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि नासिक के महाकुंभ के दौरान मेला प्रबंधन के प्रयासों और जनभागीदारी से स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के उत्कृष्ट उदाहरण सामने आएंगे।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB)

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