1 नवंबर 2026 | सामाजिक न्याय मंत्रालय ने एमएपीसीईटी पर प्लेसमेंट के आधार पर करोड़ों के भुगतान के दावे को गलत बताया। जानें तीन किस्तों के भ...
1 नवंबर 2026 | सामाजिक न्याय मंत्रालय ने एमएपीसीईटी पर प्लेसमेंट के आधार पर करोड़ों के भुगतान के दावे को गलत बताया। जानें तीन किस्तों के भुगतान का पूरा ब्योरा।

- सामाजिक न्याय मंत्रालय ने प्लेसमेंट के आधार पर करोड़ों के भुगतान के दावे को गलत बताया
- केवल पहली और दूसरी किस्त का भुगतान हुआ, तीसरी किस्त (प्लेसमेंट पर निर्भर) कहीं नहीं दी गई
- 2021-22 में 34 संस्थाओं से अनुबंध, 28 ने 4,952 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को 'द सेंट्रल क्रॉनिकल' (भोपाल) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के दावे पर तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया था कि 'मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद' (एमएपीसीईटी) ने प्लेसमेंट डेटा की पुष्टि किए बिना प्लेसमेंट के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया। मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है।
मंत्रालय के अनुसार, अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त कार्यालय ने 'अनुसूचित जाति उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता' मद के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए 3,241.37 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। वर्ष 2021-22 में एमएपीसीईटी को इस राशि में से कुल 2,945.37 लाख रुपये दिए गए।
एमएपीसीईटी ने बीपीएल परिवारों के अनुसूचित जाति लाभार्थियों के लिए आरएफपी जारी किया। चयन के बाद 34 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं के साथ अनुबंध हुए। इनमें से छह संस्थाओं ने काम शुरू नहीं किया। बाकी 28 संस्थानों ने 4,952 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया। मंत्रालय के अनुसार, प्रशिक्षण कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के मानकों के अनुरूप है।
मंत्रालय ने बताया कि भुगतान की तीन किस्तें हैं। पहली किस्त प्रशिक्षणार्थियों के भौतिक सत्यापन के बाद बैच शुरू होने पर दी जाती है। दूसरी किस्त प्रशिक्षण पूरा होने और मूल्यांकन के बाद दी जाती है, जिसके लिए कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी है। केवल पहली और दूसरी किस्त का भुगतान किया गया है।
तीसरी किस्त प्लेसमेंट पर निर्भर है। इसके लिए संस्थानों को पोर्टल पर प्लेसमेंट का विवरण अपलोड करना होता है, जिसके बाद ही पोर्टल भुगतान का दावा बनाता है। मंत्रालय के अनुसार, किसी भी संस्थान के लिए ऐसा दावा नहीं बना, इसलिए तीसरी किस्त का कोई भुगतान नहीं हुआ है। हार्ड-कॉपी में दी गई जॉब ऑफर या ऑफर लेटर की जानकारी के आधार पर तीसरी किस्त जारी नहीं की जा सकती।
मंत्रालय ने कहा कि तीसरी किस्त का भुगतान तब होगा जब उम्मीदवार प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नौकरी शुरू करेंगे। फिलहाल संस्थाएँ प्लेसमेंट दिलाने में मदद कर रही हैं।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB)

कोई टिप्पणी नहीं