4TH COLUMN .IN जनहित • जनसरोकार • निष्पक्ष पत्रकारिता विशेष समाचार | बस्तर 08 नवम्बर 2026 राष्ट्रीय...
जवानों के बीच दीपावली मनाने बस्तर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, करनपुर CRPF कैंप में वीर जवानों के साथ मनाया पर्व
जवानों के नाम प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री ने बस्तर रवाना होने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि वे वीर सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपावली मनाने बस्तर जा रहे हैं। उन्होंने बस्तर में कभी नक्सलवाद के प्रभाव और अब विकास की गतिविधियों के विस्तार का उल्लेख करते हुए जवानों के बलिदान, निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को नमन किया।
बस्तर की बदलती तस्वीर और सुरक्षा बलों की भूमिका
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल दीपावली उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध लंबे समय तक चले अभियान में सुरक्षा बलों के योगदान के सम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है। दशकों तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, अंदरूनी इलाकों तक प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने और विकास गतिविधियों को गति देने में केंद्रीय सुरक्षा बलों तथा छत्तीसगढ़ पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में आगे बढ़ते बस्तर के पीछे सुरक्षा बलों का त्याग और स्थानीय जनता का विश्वास महत्वपूर्ण है।
CRPF की उपलब्धि भी चर्चा में
इस दौरे का एक महत्वपूर्ण संदर्भ CRPF की उपलब्धि भी है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने लगातार 12 महीने तक अभियान के दौरान किसी भी जवान की ऑपरेशनल मृत्यु नहीं होने का रिकॉर्ड दर्ज किया है। बल के महानिदेशक जीपी सिंह ने इसके पीछे आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और घायल जवानों को तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की व्यवस्था को प्रमुख कारण बताया है।
2014 से जवानों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के बाद से प्रत्येक वर्ष दीपावली का पर्व देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ मनाते रहे हैं। सियाचिन से शुरू हुई यह परंपरा विभिन्न सीमावर्ती और सामरिक महत्व वाले क्षेत्रों तक पहुंची है। वर्ष 2025 में उन्होंने INS विक्रांत पर नौसैनिकों के साथ दीपावली मनाई थी। इस वर्ष बस्तर का चयन विशेष महत्व रखता है।
विशेष विश्लेषण | सुरक्षा से आगे विकास की चुनौती
प्रधानमंत्री का बस्तर आगमन इस क्षेत्र को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। यह दौरा उन सुरक्षा बलों के मनोबल को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबे संघर्ष के बीच अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। हालांकि, बस्तर के समग्र विकास की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, संचार, पेयजल और स्थानीय आदिवासी समुदायों के अधिकारों को भी समान प्राथमिकता मिलेगी। शांति और विकास की यह यात्रा स्थानीय जनता की भागीदारी से ही स्थायी स्वरूप प्राप्त कर सकती है।

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