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बेमेतरा के जनता गांव में खेत बचाओ अभियान-2026 के तहत किसानों से वैज्ञानिकों का संवाद

31 अक्टूबर 2026 | बेमेतरा के जनता गांव में खेत बचाओ अभियान-2026 के तहत कृषक-वैज्ञानिक संवाद हुआ। मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और ज...

31 अक्टूबर 2026 | बेमेतरा के जनता गांव में खेत बचाओ अभियान-2026 के तहत कृषक-वैज्ञानिक संवाद हुआ। मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती पर जानकारी दी गई। 35 किसान शामिल हुए।

बेमेतरा के जनता गांव में खेत बचाओ अभियान के तहत किसान कार्यक्रम
बेमेतरा के जनता गांव में खेत बचाओ अभियान के तहत किसान कार्यक्रम (फ़ोटो: जनसंपर्क विभाग, छत्तीसगढ़)
मुख्य बातें
  • जनता गांव में खेत बचाओ अभियान-2026 के तहत किसान कार्यक्रम
  • मृदा परीक्षण आधारित और संतुलित उर्वरक उपयोग पर सलाह
  • कुल 35 किसान शामिल हुए

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर ने कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा और संबंधित कृषि विभाग के सहयोग से ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के अंतर्गत ग्राम पंचायत जनता, विकासखंड बेमेतरा में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती पूजा मिश्रा और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. एस. के. जैन और डॉ. मल्लिकार्जुन जीर ने किसानों से संवाद किया। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित और विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।

वैज्ञानिकों के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य में सुधार करना है। इसके साथ उर्वरकों का आवश्यकता-आधारित उपयोग बढ़ाना, टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन को प्रोत्साहित करना और जल तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना भी उद्देश्य है। प्राकृतिक खेती और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।

किसानों को सलाह दी गई कि वे मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करें। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक खाद, कम्पोस्ट और अन्य उपलब्ध जैविक संसाधनों का उपयोग करें। फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने पर भी ज़ोर दिया गया, ताकि मृदा में जैविक पदार्थ बढ़े और उर्वरता बनी रहे।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने वैज्ञानिकों से कृषि संबंधी समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने टिकाऊ खेती की तकनीकों को अपनाने के बारे में जानकारी भी ली। कार्यक्रम में कुल 35 किसानों ने भाग लिया।

स्रोत: जनसंपर्क विभाग, छत्तीसगढ़

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