Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

डिजिटल छत्तीसगढ़ की बड़ी पहल: अब जमीन सीमांकन के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे तहसील के चक्कर

• सीमांकन की पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन, नया डिजिटल मॉड्यूल 7 दिनों में लागू करने के निर्देश : • डिजिटल छत्तीसगढ़ की बड़ी पहल: अब जमीन सीमा...

सीमांकन की पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन, नया डिजिटल मॉड्यूल 7 दिनों में लागू करने के निर्देश :

डिजिटल छत्तीसगढ़ की बड़ी पहल: अब जमीन सीमांकन के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे तहसील के चक्कर :

रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग की नई व्यवस्था के तहत अब जमीन मालिकों को नाप-जोख और सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

नई डिजिटल व्यवस्था में सीमांकन के लिए आवेदन अब लोक सेवा केंद्र, चॉइस सेंटर, राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटिजन पोर्टल अथवा सेवासेतु के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके साथ ही तहसील स्तर पर सीमांकन के ऑफलाइन अथवा मैन्युअल आवेदन दर्ज करने की व्यवस्था समाप्त की जा रही है।


आवेदन सीधे तहसीलदार तक पहुंचेगा

नई प्रणाली के तहत ऑनलाइन आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में पहुंच जाएगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक भी अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे आवेदक को आवेदन की स्थिति और प्रत्येक स्तर पर हो रही कार्रवाई की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

राजस्व विभाग की भू-अभिलेख शाखा द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक को ई-कोर्ट सॉफ्टवेयर में आवश्यक तकनीकी सुधार करते हुए नया मॉड्यूल सात दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।


सिर्फ आपत्ति होने पर जाना होगा तहसील

नई व्यवस्था के तहत जमीन सीमांकन की प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग के माध्यम से पूरी की जाएगी। यदि सीमांकन के दौरान किसी पड़ोसी अथवा अन्य पक्ष की ओर से औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं होती है, तो आवेदक को तहसील कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

केवल विवाद या आपत्ति की स्थिति में ही संबंधित पक्ष को तहसील कार्यालय में उपस्थित होना पड़ेगा। इससे निर्विवाद मामलों में समय की बचत होगी और आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों की अनावश्यक दौड़ से राहत मिलेगी।


बिचौलियों पर लगेगी लगाम, बढ़ेगी पारदर्शिता

मैन्युअल व्यवस्था समाप्त होने से कार्यालयों में अनावश्यक भागदौड़ कम होगी और बिचौलियों के हस्तक्षेप पर भी रोक लगने की उम्मीद है। तय समय-सीमा के कारण सीमांकन मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या भी कम होगी।

ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से आवेदक अपने आवेदन की स्थिति पर नजर रख सकेंगे और प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी।


ई-गवर्नेंस की दिशा में एक और बड़ा कदम

राजस्व विभाग पहले ही कई महत्वपूर्ण सेवाओं को ऑनलाइन कर चुका है। नागरिक घर बैठे डिजिटल हस्ताक्षरित बी-1 और पी-II, खसरा और खतौनी की क्यूआर कोड युक्त प्रमाणित प्रतियां डाउनलोड कर सकते हैं।

जमीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा ऑनलाइन नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि यानी डायवर्सन, नजूल भूमि के टैक्स रिकॉर्ड तथा राजस्व अदालतों में लंबित मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई की जानकारी भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

राजस्व विभाग की यह नई पहल छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत करने तथा आम नागरिकों को पारदर्शी और सुविधाजनक राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कोई टिप्पणी नहीं

Girl in a jacket