राष्ट्रपति भवन तक पहुंची बदलते बस्तर की गूंज 164 सदस्यीय जनजातीय प्रतिनिधिमंडल ने देश की प्रथम नागरिक से साझा की संस्कृति, विकास...
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राष्ट्रपति भवन तक पहुंची बदलते बस्तर की गूंज164 सदस्यीय जनजातीय प्रतिनिधिमंडल ने देश की प्रथम नागरिक से साझा की संस्कृति, विकास और विश्वास की नई कहानी
रायपुर/नई दिल्ली। बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सामाजिक परंपराओं और बदलते विकास की नई पहचान अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच तक पहुंच चुकी है। बस्तर के परगना मांझी, चालाकी, समाज प्रमुख, बस्तर पंडुम-2026 के युवा कलाकारों, पद्मश्री सम्मान प्राप्त विभूतियों तथा जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों सहित 164 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और विकास की नई तस्वीर प्रस्तुत की।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को बताया कि कभी नक्सलवाद की चुनौती से जूझने वाला बस्तर आज तेजी से शांति, विकास और विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में हुए बदलावों ने युवाओं को नई दिशा दी है। आज बस्तर के युवा अपनी प्रतिभा, संस्कृति और परिश्रम के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहे हैं।
मुलाकात के दौरान जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों ने बस्तर की लोककला, पारंपरिक रीति-रिवाज, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी दी। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियानों में मिली सफलता और विकास कार्यों के लिए देश के नेतृत्व के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह प्रतिनिधिमंडल पूरे छत्तीसगढ़ की जनजातीय अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतिनिधित्व कर रहा है। राष्ट्रपति भवन तक बस्तर की लोकसंस्कृति की गूंज पहुंचना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

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