Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

बस्तर के माचकोट वन क्षेत्र में मिला दुर्लभ ‘स्फिरोथिका मस्की फ्रॉग’, वैज्ञानिकों ने दर्ज की मौजूदगी

• बाघ के पदचिह्नों के अध्ययन के दौरान जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक को मिला दुर्लभ निशाचर मेंढक : जगदलपुर :  बस्तर जिले के माचकोट व...

बाघ के पदचिह्नों के अध्ययन के दौरान जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक को मिला दुर्लभ निशाचर मेंढक :



जगदलपुर : बस्तर जिले के माचकोट वन परिक्षेत्र के घने जंगलों में दुर्लभ प्रजाति के स्फिरोथिका मस्की फ्रॉग (मस्की बरोइंग फ्रॉग) की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस दुर्लभ उभयचर जीव की पहचान से क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को एक नई पहचान मिली है।


जानकारी के अनुसार, माचकोट फॉरेस्ट रेंज में बाघ के पंजों के निशानों का अध्ययन करने पहुंचे जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रत्यूष महापात्र को यह दुर्लभ मेंढक सड़क पार करते हुए दिखाई दिया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसकी पहचान स्फिरोथिका मस्की फ्रॉग के रूप में की।


विशेषज्ञों के अनुसार यह एक निशाचर (रात्रिचर) प्रजाति है, जो सामान्यतः रेतीली और नम मिट्टी के भीतर छिपकर रहती है तथा वर्षा ऋतु शुरू होते ही बाहर निकलकर सक्रिय हो जाती है। यह प्रजाति प्रकृति में कम दिखाई देती है, इसलिए इसका दस्तावेजीकरण जैव विविधता अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


डॉ. प्रत्यूष महापात्र ने बताया कि यह मध्यम आकार का मेंढक होता है, जिसका सिर शरीर की तुलना में अधिक चौड़ा होता है। इसकी पिछली टांगों में फावड़े जैसी विशेष संरचना होती है, जो इसे गीली मिट्टी में आसानी से खुदाई करने में सक्षम बनाती है। इसकी पीठ पर अंग्रेजी के उल्टे ‘V’ आकार का निशान और शरीर पर पीले-कत्थई रंग के धब्बे इसकी प्रमुख पहचान हैं।


वैज्ञानिकों के मुताबिक यह प्रजाति अस्थायी जलभराव वाले गड्ढों और छोटे जल स्रोतों में प्रजनन करती है। भारत के अलावा यह दुर्लभ मेंढक पाकिस्तान और नेपाल में भी पाया जाता है।


डॉ. महापात्र ने बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान जंगलों में रात्रिकालीन सर्वेक्षण से कई दुर्लभ और कम ज्ञात जीव-जंतुओं की प्रजातियों की जानकारी सामने आती है। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली मेंढकों की विभिन्न प्रजातियों पर आधारित एक विस्तृत पुस्तक शीघ्र प्रकाशित होने वाली है, जिससे प्रदेश की जैव विविधता के अध्ययन को नई दिशा मिलेगी।


वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि माचकोट वन क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रजाति की उपस्थिति बस्तर के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की समृद्धि और संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाती है।

कोई टिप्पणी नहीं

Girl in a jacket