"बस्तर वनमंडल की बड़ी पहल: संवेदनशील क्षेत्रों में मॉकड्रिल, वन अपराधों पर सख्ती के लिए अमला हुआ अलर्ट" जगदलपुर, 19 जून। (रोमेश न...
जगदलपुर, 19 जून। (रोमेश नामदेव) बस्तर वनमंडल ने वनों की सुरक्षा एवं वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वन परिक्षेत्र भानपुरी के संवेदनशील क्षेत्रों बनियागांव एवं पिपलावंड में वनमंडल स्तरीय मॉकड्रिल का आयोजन किया। इस विशेष अभ्यास का उद्देश्य वन विभाग के अमले की आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना तथा वन अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की रणनीति को और अधिक मजबूत बनाना था।
वन विभाग के अनुसार क्षेत्र में अवैध कटाई, अतिक्रमण, वन भूमि पर कब्जा तथा वन्यजीवों के शिकार जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए यह मॉकड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास के दौरान वन अमले को सूचना प्राप्त होने के बाद तत्काल सक्रिय होने, उच्च अधिकारियों को सूचित करने, घटनास्थल तक शीघ्र पहुंचने और प्रभावी कार्रवाई करने की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया गया।
मॉकड्रिल के दौरान वन विभाग की टीम ने बनियागांव एवं पिपलावंड के जंगलों में सघन गश्त की। अभ्यास के तहत वन अपराधों से संबंधित काल्पनिक मामलों को दर्ज कर कार्रवाई की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों, ट्रैक्टर चालकों एवं स्थानीय नागरिकों को वन संरक्षण के महत्व से अवगत कराया तथा अवैध अतिक्रमण और वन क्षति के कानूनी परिणामों की जानकारी दी।
वन अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे वन संपदा की सुरक्षा में सहयोग करें तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को दें। विभाग द्वारा ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण एवं वन्यजीव सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया गया।
इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी बस्तर श्री उत्तम कुमार गुप्ता, उप वनमंडलाधिकारी श्री आईपी बंजारे, श्री योगेश रात्रे एवं श्री सुखदास नाग सहित समस्त परिक्षेत्र अधिकारी, परिक्षेत्र सहायक, परिसर रक्षक एवं सुरक्षा श्रमिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
वनमंडलाधिकारी श्री उत्तम कुमार गुप्ता ने कहा कि वन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा एवं जलवायु परिवर्तन से मुकाबले का प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहा कि वन और वन्यजीव एक-दूसरे के पूरक हैं तथा उनका संरक्षण मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वनों की रक्षा को केवल वन विभाग की जिम्मेदारी न समझें, बल्कि इसे सामाजिक और नैतिक दायित्व मानते हुए सभी लोग सक्रिय भागीदारी निभाएं। बस्तर वनमंडल की यह पहल वन संरक्षण एवं वन अपराधों पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


कोई टिप्पणी नहीं