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कृषि महाविद्यालय जगदलपुर के 90 छात्रों ने किया उत्तर भारत का शैक्षणिक भ्रमण, राष्ट्रीय संस्थानों की कार्यप्रणाली को समझा

जगदलपुर :  विद्यार्थियों को व्यावहारिक, रोजगारोन्मुखी एवं उद्यमिता आधारित शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि महाविद्यालय जगदलपुर द्वारा रा...

जगदलपुर : विद्यार्थियों को व्यावहारिक, रोजगारोन्मुखी एवं उद्यमिता आधारित शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि महाविद्यालय जगदलपुर द्वारा राष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस दौरान बीएससी कृषि तृतीय वर्ष के 90 छात्र-छात्राओं ने उत्तर भारत स्थित विभिन्न राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का भ्रमण कर आधुनिक कृषि, डेयरी एवं अनुसंधान प्रणालियों की जानकारी प्राप्त की।



यह शैक्षणिक दौरा 14 मई से 23 मई 2026 तक आयोजित किया गया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरएस नेताम के मार्गदर्शन में आयोजित इस भ्रमण को डॉ. अश्विनी ठाकुर, सहसंचालक जोनल एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर तथा डॉ. एन.सी. मंडावी, प्रभारी शैक्षणिक शाखा के विशेष प्रयासों से सफल बनाया गया।

छात्रों के दल को चार समूहों में विभाजित कर पांच प्राध्यापकों के नेतृत्व में भ्रमण कराया गया। भ्रमण प्रभारी डॉ. पीके सलाम, कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ. नीता मिश्रा, डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता, डॉ. चेतना खांडेकर एवं सह-समन्वयक संदीप ने पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। वहीं छात्र सौरभ के नेतृत्व और विद्यार्थियों के बेहतर समन्वय से पूरा टूर अनुशासन एवं उत्कृष्टता की मिसाल बना रहा।

📌 राष्ट्रीय संस्थानों का किया अध्ययन

जगदलपुर से शुरू हुए इस भ्रमण में छात्र रायपुर, दिल्ली, करनाल, मनाली और देहरादून पहुंचे। दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नेशनल प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेस एवं नेशनल जीन बैंक में छात्रों ने एडवांस कृषि प्रणाली और अनुसंधान कार्यों का अध्ययन किया।

आईएआरआई के डॉ. मेहरा, डॉ. विनोद गुप्ता, अविनाश एवं एनबीपीजीआर की डॉ. संध्या ने विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि अनुसंधान की बारीकियों से अवगत कराया।

📌 डेयरी और पशुपालन की आधुनिक तकनीकों से हुए रूबरू

करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में छात्रों ने साहीवाल, थारपारकर, करन स्विस और करन फ्रिज नस्ल की गायों तथा मुर्राह भैंसों का अवलोकन किया।

सेंटर प्रभारी डॉ. नितिन त्यागी ने विद्यार्थियों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रबंधन और पशुपालन तकनीकों की जानकारी दी। वहीं एबीआरसी में छात्रों ने चयनित सांडों से वीर्य संग्रहण और कृत्रिम गर्भाधान प्रक्रिया को समझा।

क्लोन तकनीक से विकसित भैंसे ‘श्रेष्ठ’, ‘तेजस’ और ‘करण’ विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र रहे।

📌 हिमाचल और उत्तराखंड में भी किया अध्ययन

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू स्थित कृषि विज्ञान केंद्र एवं हॉर्टिकल्चर संस्थानों में स्थानीय कृषि फसलों और उत्पादन तकनीकों का अध्ययन किया गया। छात्रों ने मनाली, रोहतांग दर्रा और हिडिंबा मंदिर का भ्रमण कर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद भी लिया।

इसके बाद उत्तराखंड के देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च अकादमी एवं सेंट्रल एकेडमी फॉर स्टेट फॉरेस्ट सर्विस का भ्रमण कराया गया। यहां प्रभारी अमलेंदु पाठक ने विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

📌 छात्रों ने साझा किए अनुभव

छात्र दीपराज ने इस भ्रमण को सीखने और रोमांच का अद्भुत संगम बताया। छात्र जमीरूल ने कहा कि इस यात्रा ने उन्हें कक्षा से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन में कृषि और अनुसंधान को समझने का अवसर दिया।

वहीं छात्रा रूपाली भारद्वाज ने कहा कि यह भ्रमण उनकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक प्रेरणादायक साबित हुआ।

राष्ट्रीय संस्थानों के अध्ययन और व्यावहारिक अनुभव से लौटे विद्यार्थियों में अब उच्च शिक्षा और कृषि अनुसंधान के प्रति नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

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