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आज के ही दिन अस्तित्व में आया था जगदलपुर, 305 वर्षों का ऐतिहासिक सफर पूरा

 "आज के ही दिन अस्तित्व में आया था जगदलपुर, 305 वर्षों का ऐतिहासिक सफर पूरा" जगदलपुर। बस्तर संभाग का प्रमुख शहर जगदलपुर आज अपना 30...

 "आज के ही दिन अस्तित्व में आया था जगदलपुर, 305 वर्षों का ऐतिहासिक सफर पूरा"

जगदलपुर। बस्तर संभाग का प्रमुख शहर जगदलपुर आज अपना 305वां स्थापना दिवस मना रहा है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, वर्ष 1721 में तत्कालीन बस्तर महाराजा दलपत देव ने अक्षय तृतीया के दिन अपनी राजधानी को बस्तर से स्थानांतरित कर जगदलपुर में स्थापित किया था। इसी के साथ इस शहर का विधिवत अस्तित्व प्रारंभ हुआ।

बताया जाता है कि उस समय जगदलपुर एक छोटा-सा ग्राम था, जहां मात्र 16 झोपड़ियां मौजूद थीं। धीरे-धीरे समय के साथ यह क्षेत्र विकसित होता गया और आज यह एक प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। वर्तमान में शहर की आबादी लगभग 1.87 लाख तक पहुंच गई है, जो इसके विकास और विस्तार की कहानी बयां करती है।

इतिहासकारों के अनुसार, पहले इस क्षेत्र को ‘जगनगुड़ा’ कहा जाता था, जिसका नाम स्थानीय मुखिया ‘जगतु माहरा’ के नाम पर पड़ा था। बाद में ‘जगन’ से ‘जग’ और ‘गुड़ा’ से ‘दल’ शब्दों के मेल से ‘जगदलपुर’ नाम प्रचलन में आया। बस्तर के राजाओं द्वारा इस क्षेत्र को राजधानी बनाए जाने के बाद यहां प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में तेजी आई।

अक्षय तृतीया के दिन राजधानी बनने के कारण इस तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। आज भी इस दिन को शहर में गौरव और उत्सव के रूप में याद किया जाता है। जगदलपुर न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जनजातीय विरासत का भी केंद्र है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में नगर निगम क्षेत्र के विस्तार के साथ आसपास के कई गांव भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जिससे आबादी और विकास दोनों में और वृद्धि होने की संभावना है।



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