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आसना में पारंपरिक ‘जतरा सेवा’ पूजा संपन्न, संस्कृति संरक्षण के लिए बादल टीम का दस्तावेजीकरण

  जगदलपुर, 12 अप्रैल 2026  बस्तर अंचल की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने की दिशा में ग्राम आसना स्थित परदेसिन माता गुड़ी में 11 अप्रै...

 जगदलपुर, 12 अप्रैल 2026 बस्तर अंचल की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने की दिशा में ग्राम आसना स्थित परदेसिन माता गुड़ी में 11 अप्रैल को पारंपरिक ‘जतरा सेवा’ पूजा का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए देवी-देवताओं की आराधना की गई।



कार्यक्रम के दौरान बस्तर एकेडमी ऑफ डांस आर्ट एंड लिटरेचर (बादल), आसना की टीम ने सांस्कृतिक संरक्षण के उद्देश्य से आयोजन का फोटो एवं वीडियो दस्तावेजीकरण किया। टीम ने इस अवसर पर स्थानीय परंपराओं, वाद्य धुनों और पूजा विधि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी संकलित की।


पारंपरिक वाद्य यंत्रों के वादक मोहरिया खैरू ने बताया कि वे ग्राम माड़पाल से इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे, जबकि उनके साथ नगाड़ा और तुड़बुड़ी वादक ग्राम उपनपाल से आए थे। उन्होंने बताया कि वे वर्षों से ऐसे धार्मिक आयोजनों में पारंपरिक धुनों का वादन करते आ रहे हैं। जतरा सेवा के दौरान देवी की सवारी निकलने के बाद विभिन्न वाद्य यंत्रों की विशेष धुनें बजाई जाती हैं, जिन पर देवी की सवारी धारण करने वाले श्रद्धालु नृत्य करते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि जतरा सेवा पूजा में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पारंपरिक रूप से बलि पूजा का भी प्रावधान होता है। आयोजन में दुवार मुण्डेया देवता, परदेसिन माता सहित अन्य देवी-देवताओं की आराधना के दौरान विशिष्ट वाद्य धुनों का वादन किया गया।

इस पूरे आयोजन का दस्तावेजीकरण बादल संस्था के प्रशासक आशुतोष ठाकुर के मार्गदर्शन में टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में ग्राम आसना के सिरहा, पुजारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रही, जिससे आयोजन में पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का सजीव चित्र देखने को मिला।

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