"इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बेचने वाली फर्म से बनवा ली कागजी सड़क, 15वें वित्त की राशि में गड़बड़ी का आरोप"...
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"इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बेचने वाली फर्म से बनवा ली कागजी सड़क, 15वें वित्त की राशि में गड़बड़ी का आरोप"
जगदलपुर। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़े देवड़ा में 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में सीसी रोड निर्माण के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान एक ऐसी फर्म को कर दिया गया, जो इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का कारोबार करती है। मामले में कार्य केवल कागजों में दिखाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर सड़क का निर्माण नहीं हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत में गड्ढम घर से जेसिंग घर तक सीसी सड़क निर्माण के नाम पर करीब 1 लाख 60 हजार 400 रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। यह भुगतान “राजवीर इलेक्ट्रॉनिक” नामक फर्म को किया गया, जबकि उक्त फर्म का मुख्य कार्य इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री बताया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए इस फर्म को भुगतान किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में तालाब सफाई, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट मरम्मत और अन्य विकास कार्यों के नाम पर भी राशि निकाली गई, लेकिन कई कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। इससे 15वें वित्त आयोग की राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
यह है ग्रामीणों का आरोप:
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में न तो नई स्ट्रीट लाइट लगाई गई और न ही पुरानी लाइटों की सही तरीके से मरम्मत हुई, फिर भी मरम्मत के नाम पर 44 हजार 100 रुपए का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा, वर्ष 2023-24 और 2024-25 में हुए सभी कार्यों की थर्ड पार्टी ऑडिट कराने और भुगतान की जांच की मांग ग्रामीणों ने प्रशासन से की है।
डिजिटल हस्ताक्षर से भुगतान, जांच की मांग तेज:
जानकारी के अनुसार, भुगतान पंचायत सचिव और सरपंच द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से स्वीकृत किया गया। लेकिन कार्यस्थल पर निर्माण के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलने से संदेह और गहरा गया है। नियमों के मुताबिक, ऐसे कार्यों के लिए तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, जीओ-टैग फोटो और भौतिक सत्यापन अनिवार्य होता है, जो इस मामले में संदिग्ध बताया जा रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग:
ग्रामीणों ने कलेक्टर बस्तर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत हुए सभी कार्यों का ऑडिट कराने की भी अपील की गई है।


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