Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

बस्तर के विकास को लेकर सरकार पर तीखा हमला, 1 करोड़ प्रति पंचायत और 50 हजार करोड़ पैकेज की मांग

 जगदलपुर, 10 अप्रैल 2026। बस्तर क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए और क्षेत्र के समग्र...

 जगदलपुर, 10 अप्रैल 2026। बस्तर क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। वक्ताओं ने कहा कि सरकार तत्काल बस्तर के सभी ग्राम पंचायतों को 1-1 करोड़ रुपये की राशि प्रदान करे और क्षेत्र के लिए 50 हजार करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए।



पत्रकार वार्ता में कहा गया कि सरकार ने स्वयं यह घोषणा की थी कि जो ग्राम पंचायत नक्सल मुक्त हो जाएगी, उसे 1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। अब जबकि मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय और राज्य के गृह मंत्री तक यह दावा कर रहे हैं कि बस्तर सहित पूरा प्रदेश नक्सल मुक्त हो चुका है, तो सरकार को अपनी घोषणा के अनुरूप बस्तर संभाग सहित राजनांदगांव, मोहला-मानपुर, बलरामपुर, कवर्धा, गरियाबंद और धमतरी जैसे नक्सल प्रभावित जिलों की सभी पंचायतों को तत्काल यह राशि जारी करनी चाहिए।

वक्ताओं ने मांग की कि बस्तर को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए “डबल इंजन” सरकार 50 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज घोषित करे। साथ ही क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। बस्तर के युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की भी मांग की गई।

एनएमडीसी मुख्यालय बस्तर में खोलने की मांग

पत्रकार वार्ता में NMDC Limited का मुख्यालय बस्तर में स्थापित करने की मांग भी उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि बस्तर से लौह अयस्क का खनन कर देश-विदेश में आपूर्ति की जाती है, लेकिन कंपनी का मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है। वर्तमान में बस्तर में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो चुका है, इसलिए मुख्यालय को यहां स्थानांतरित करने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

खनिज संपदा के निजीकरण पर जताई आशंका

स्थानीय निवासियों की ओर से यह आशंका भी जताई गई कि सरकार बस्तर की खनिज संपदा और जंगलों को निजी उद्योगपतियों को सौंप सकती है। वक्ताओं ने मांग की कि सरकार स्पष्ट गारंटी दे कि बस्तर में किसी भी बड़े उद्योगपति की एंट्री आदिवासी भावनाओं के विपरीत नहीं होगी और नगरनार स्टील प्लांट या बैलाडीला-नंदराज पहाड़ियों का निजीकरण नहीं किया जाएगा।

रेल कनेक्टिविटी और अधूरी परियोजनाओं पर सवाल

बस्तर की रेल कनेक्टिविटी को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए गए। दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा गया कि वर्ष 2017-18 में इसका उद्घाटन हुआ था और 2021 तक पूरा होने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक परियोजना अधूरी है, जो क्षेत्र की जनता के साथ छलावा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप

पत्रकार वार्ता में महिला एवं बाल विकास विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को निम्न गुणवत्ता की और कम लंबाई-चौड़ाई वाली साड़ियां वितरित की गईं, जिससे वे उपयोग के योग्य नहीं हैं। वक्ताओं ने कहा कि विभाग भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का केंद्र बन गया है।

इसके अलावा पोषण सामग्री खरीद, सामूहिक कन्या विवाह योजना, आंगनबाड़ी केंद्रों में टीवी और आरओ यूनिट की खरीद सहित कई योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। मांग की गई कि घटिया साड़ियों को वापस लेकर बेहतर गुणवत्ता की साड़ियां वितरित की जाएं और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

सरकार से त्वरित निर्णय की मांग

पत्रकार वार्ता में अंत में कहा गया कि यदि सरकार जल्द ही इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो बस्तर के लोग व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

कोई टिप्पणी नहीं

Girl in a jacket