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बस्तर मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर, किसानों को मिल रहा सीधा लाभ

मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता की राह पर बस्तर रिकॉर्ड उत्पादन और किसानों को मिल रहा भरपूर लाभ जगदलपुर, 07 अगस्त 2025/ बस्तर जिले...

मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता की राह पर बस्तर

रिकॉर्ड उत्पादन और किसानों को मिल रहा भरपूर लाभ

जगदलपुर, 07 अगस्त 2025/ बस्तर जिले में मछली पालन विभाग द्वारा संचालित शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मछली पालन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हासिल की गई है। इससे स्थानीय मछुआरों और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त भी किया जा रहा है। बस्तर जिला मछली बीज उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है।

जिले में मछली पालन विभाग द्वारा दो प्रमुख केंद्रों – मत्स्य बीज प्रक्षेत्र बालेंगा और मोती तालाब मत्स्य बीज प्रक्षेत्र जगदलपुर – के माध्यम से मछली बीज उत्पादन का कार्य किया जा रहा है।

बालेंगा केंद्र की उपलब्धियां

  • वर्ष 2024-25 में 8 करोड़ स्पान और 60.32 लाख स्टैंडर्ड फ्राय का उत्पादन – लक्ष्य से अधिक।
  • 2025-26 में 8.32 करोड़ स्पान और 2.32 लाख फ्राय का वितरण – प्रगति जारी।

मोती तालाब केंद्र का प्रदर्शन

  • 2024-25 में 2.06 करोड़ फ्राय उत्पादन, लक्ष्य 1.80 करोड़ से अधिक।
  • 2025-26 में अब तक 60 लाख स्टैंडर्ड फ्राय का वितरण।

किसानों को सशक्त बनाने वाली योजनाएं

1. मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन योजना

इस योजना के अंतर्गत किसानों को शत-प्रतिशत अनुदान पर स्पान और आहार सामग्री दी जाती है ताकि वे स्वयं मछली बीज तैयार कर आर्थिक लाभ कमा सकें। 2024-25 में 15 और 2025-26 में 17 कृषक लाभान्वित हुए।

2. मत्स्य अंगुलिका क्रय कर संचयन पर आर्थिक सहायता योजना

1 से 10 हेक्टेयर तालाब वाले मछुआरों को प्रतिवर्ष ₹4000 में से ₹2000 अनुदान मिलता है। साथ ही उन्हें 5000 नग बीज पैकिंग सहित प्रदान किए जाते हैं।

  • 2024-25 में 796 मत्स्य पालकों को 1.05 करोड़ बीज दिए गए।
  • 2025-26 में 1000 इकाई वितरण का लक्ष्य।

इन सफल प्रयासों से बस्तर जिले ने मछली पालन के क्षेत्र में एक मजबूत और आत्मनिर्भर मॉडल प्रस्तुत किया है, जिससे न केवल खाद्य सुरक्षा बढ़ी है बल्कि ग्रामीण आजीविका को भी नया आधार मिला है।

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