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छत्तीसगढ़: ऊर्जा संकट से ऊर्जा हब बनने तक का सफर

  छत्तीसगढ़: ऊर्जा संकट से ऊर्जा हब बनने तक का सफर: रायपुर : मे 1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ ने अलग राज्य के रूप में अपनी नई पहचान बनाई, तब ...

 छत्तीसगढ़: ऊर्जा संकट से ऊर्जा हब बनने तक का सफर:

रायपुर : मे 1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ ने अलग राज्य के रूप में अपनी नई पहचान बनाई, तब उसकी झोली में गौरव कम और चुनौतियाँ ज्यादा थीं। सबसे बड़ी चुनौती थी—ऊर्जा संकट। राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में कुल 1400 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता था, जो राज्य की जरूरतों के मुकाबले नाकाफी था।

सरकार के सामने दो ही रास्ते थे—या तो हाथ पर हाथ धरे बैठी रहे, या फिर जोखिम उठाकर हालात बदलने की कोशिश करे। सत्ता में आई पहली सरकार ने दूसरा रास्ता चुना। कुछ फैसले 'गैर-कानूनी' माने गए, लेकिन वे फैसले ही आधार बने उस छत्तीसगढ़ के, जिसे आज लोग 'ऊर्जा प्रदेश' के नाम से जानते हैं।

इन शुरुआती फैसलों में तेज़ी से पुराने प्लांटों की मरम्मत, निजी निवेश को प्रोत्साहन और नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना जैसे कदम शामिल थे। इन सबके बीच नियामकीय बाधाएं भी थीं, लेकिन सरकार ने तत्काल जरूरतों को प्राथमिकता दी।

आज, वही छत्तीसगढ़ न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतें खुद पूरी करता है, बल्कि दूसरे राज्यों को बिजली सप्लाई कर रहा है। कोरबा, रायगढ़ और चंपा जैसे जिले देश के बड़े ऊर्जा केंद्र बन चुके हैं।

यह कहानी है एक ऐसे राज्य की जिसने संकट को अवसर में बदला, और जोखिम उठाकर खुद को ‘ऊर्जा हब’ में तब्दील कर दिया।




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