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डोपामाइन की कमी से ब्रेन का संतुलन बिगड़ रहा: अब युवाओं को भी हो रही पार्किंसंस की बीमारी

  25 से 35 साल की उम्र में दिखने लगे लक्षण, भूलने की आदत, समझने में परेशानी, डिमेंशिया भी संकेत हो सकते हैं: रायपुर: पार्किंसंस बीमारी को अब...

 

25 से 35 साल की उम्र में दिखने लगे लक्षण, भूलने की आदत, समझने में परेशानी, डिमेंशिया भी संकेत हो सकते हैं:

रायपुर: पार्किंसंस बीमारी को अब तक बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, लेकिन हाल के सालों में 25 से 35 साल के युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। ब्रेन में डोपामाइन रसायन की कमी इस बीमारी की मुख्य वजह मानी जा रही है।

लक्षणों में थोड़ी-थोड़ी देर में भूल जाना, किसी भी बात को समझने और सोचने में परेशानी, डिमेंशिया जैसे संकेत शामिल हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे ब्रेन के मोटर कंट्रोल को प्रभावित करती है, जिससे व्यक्ति अपने शरीर की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं रख पाता।

विशेषज्ञों के मुताबिक, समय रहते पहचान और इलाज न होने पर यह बीमारी जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। पहले यह बीमारी 60 साल से ऊपर के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में तनाव, अनियमित जीवनशैली और मानसिक दबाव इसके नए कारण बन रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी को बार-बार भूलने की आदत हो, हाथ-पैर कांपते हों या सोचने में मुश्किल हो, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। समय रहते इलाज शुरू करने से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


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