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बूढ़ातालाब पर दोहरा फैसला: एक ही कंपनी को दो बार ठेका, लागत 18 करोड़ बढ़ी

  बूढ़ातालाब पर दोहरा फैसला: एक ही कंपनी को दो बार ठेका, लागत 18 करोड़ बढ़ी: रायपुर: राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक बूढ़ातालाब को लेकर प्रशासन क...

 बूढ़ातालाब पर दोहरा फैसला: एक ही कंपनी को दो बार ठेका, लागत 18 करोड़ बढ़ी:

रायपुर: राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक बूढ़ातालाब को लेकर प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं। 2018 में, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने इस तालाब के सौंदर्यीकरण और चौपाटी निर्माण के लिए 12 करोड़ में एक प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया था, लेकिन जनता के विरोध के बाद यह सौदा रद्द कर दिया गया। अब 30 करोड़ रुपए खर्च कर इसे संवारने के बाद, वही ठेका फिर से उसी कंपनी को दे दिया गया है।

यह फैसला न सिर्फ मनमानी को दर्शाता है, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि 2018 में चौपाटी पर विरोध था, तो अब 18 करोड़ अधिक खर्च कर वही निर्णय क्यों दोहराया गया? प्रशासन की इस नीति पर जनता और विशेषज्ञों में असंतोष है।


ऐतिहासिक धरोहर की अनदेखी?

बूढ़ातालाब सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शहर का वाटर रिचार्ज सिस्टम भी है। यहां संत बालकदास की समाधि और ऐतिहासिक धरोहरें भी मौजूद हैं। ऐसे में तालाब को बार-बार ठेके पर देना इसके मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचा सकता है।


विरोध के बाद भी वही नीति क्यों?

2018 में चौपाटी प्रोजेक्ट पर स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने विरोध किया था। तब कहा गया था कि तालाब के पारंपरिक स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं होगी। लेकिन अब 30 करोड़ खर्च कर, फिर से वही योजना लागू करने का क्या औचित्य है?


आगे की राह:

इस फैसले को लेकर प्रशासन को जवाब देना होगा कि जनता के विरोध के बाद भी वही कंपनी को दोबारा ठेका क्यों दिया गया? क्या यह पारदर्शिता के खिलाफ नहीं है?

अब जनता और विशेषज्ञों की नजरें प्रशासन पर हैं कि यह फैसला ऐतिहासिक विरासत के हित में है या सिर्फ ठेकेदारों के फायदे के लिए लिया गया है।


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