1 नवंबर 2026 | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में शाम...
1 नवंबर 2026 | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में शामिल हुए। जानें उनके संबोधन की मुख्य बातें।

- एकता नगर में सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह
- नक्सल प्रभावित जिले 2015 में 126 से घटकर मार्च 2026 तक शून्य
- विश्व बैंक रिपोर्ट: 2024 से पहले के 10-12 वर्षों में 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लिया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सुबह के पारंपरिक कार्यक्रम के बजाय शाम के समारोह में हुए बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने भारत पर्व पवेलियन में प्रस्तुत प्रदर्शन और सुबह की रन फॉर यूनिटी में लाखों नागरिकों की भागीदारी को भी याद किया।
प्रधानमंत्री ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस स्मारक का दौरा करने पर मन भारतीय नागरिक होने के गर्व और सरदार पटेल के प्रति कृतज्ञता से भर जाता है। उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता के बाद, उन्होंने 550 से अधिक रियासतों को एकजुट किया और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर इस राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया।"
इस वर्ष एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता परेड पुलिस और सुरक्षा बलों के शौर्य को समर्पित थी। परेड में भारत की विरासत और आकांक्षाओं को दर्शाने वाली झांकियां भी शामिल थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि एकता दिवस अब केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनगौरव का उत्सव बन गया है।
प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को आधुनिक भारत के भौगोलिक और राजनीतिक स्वरूप को आकार देने वाला बड़ा नेता बताया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने देश को भौगोलिक और भावनात्मक रूप से एकजुट कर आधुनिक भारत की नींव रखी। गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का भी उन्होंने उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती के बाद के दो वर्षों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ लिए गए संकल्प को देश ने कम समय में पूरा करने की दिशा में काम किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी, जो मार्च 2026 तक शून्य हो गई। प्रधानमंत्री के अनुसार इन क्षेत्रों में सड़क, मोबाइल नेटवर्क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।
गरीबी पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने विश्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 से पहले के 10-12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि शांति स्थापना के लिए बलिदान देने वाले सुरक्षाकर्मियों को उन्होंने श्रद्धांजलि दी और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से आए परिवारों का स्वागत किया।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB)

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