31 अक्टूबर 2026 | श्रम और रोजगार मंत्रालय के एनसीएससी-डीए ने दिवाली मेले में दिव्यांगजनों के हस्तनिर्मित उत्पादों और शिल्प कौशल का प्रदर्श...
31 अक्टूबर 2026 | श्रम और रोजगार मंत्रालय के एनसीएससी-डीए ने दिवाली मेले में दिव्यांगजनों के हस्तनिर्मित उत्पादों और शिल्प कौशल का प्रदर्शन किया। जानें मेले के बारे में।

- दिल्ली, तिरुवनंतपुरम, देहरादून, भुवनेश्वर, कोलकाता और मुंबई के एनसीएससी-डीए केंद्रों के उत्पाद प्रदर्शित
- बैग, मोमबत्तियां, पेंटिंग, साबुन, बुनाई, कढ़ाई और लकड़ी के काम सहित विस्तृत श्रृंखला
- देश भर में 24 एनसीएससी-डीए केंद्र करियर परामर्श और प्लेसमेंट सहायता देते हैं
श्रम और रोजगार मंत्रालय के रोजगार महानिदेशालय (डीजीई) के तहत दिव्यांगों के लिए राष्ट्रीय करियर सेवा केंद्र (एनसीएससी-डीए) ने दिवाली मेले का आयोजन किया। इसमें देश भर के उसके केंदों में प्रशिक्षित विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के हस्तनिर्मित उत्पाद, शिल्प कौशल और व्यावसायिक कौशल प्रदर्शित किए गए।
मेले में दिल्ली, तिरुवनंतपुरम, देहरादून, भुवनेश्वर, कोलकाता और मुंबई में एनसीएससी-डीए केंद्रों के दिव्यांग प्रशिक्षुओं और पूर्व-छात्रों के उत्पाद एक साथ लाए गए। प्रदर्शनी में जूट और कपड़े के बैग, मोमबत्तियां, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, पेंटिंग, साबुन, क्रोकेट उत्पाद, ड्रेस और कपड़ा सामान, बुनाई, कढ़ाई, लकड़ी का काम और सजावटी उत्सव उत्पाद शामिल थे।
स्टालों पर प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता दिखाने और आगंतुकों से सीधे बातचीत करने का मौका मिला। उन्हें प्रतिक्रिया लेने और बिक्री, स्वरोजगार और बाजार संपर्क के अवसरों को समझने का भी मंच मिला। प्रदर्शित उत्पाद एनसीएससी-डीए केंद्रों में दिए जाने वाले पारंपरिक शिल्प और समकालीन व्यावसायिक प्रशिक्षण, दोनों को दर्शाते हैं।
श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने कहा कि मेला कौशल विकास, श्रम की गरिमा और आर्थिक स्वतंत्रता के जरिए दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता दिखाता है। उनके अनुसार, उचित प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर दिव्यांगजन कुशल कारीगर, उद्यमी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदानकर्ता बन सकते हैं।
मेले का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विकसित शिल्प कौशल को एक मंच पर लाना था। साथ ही दिव्यांग कारीगरों और प्रशिक्षुओं की प्रतिभा का उत्सव मनाना और समावेशी आर्थिक विकास में उनके योगदान को मान्यता देना भी इसका लक्ष्य था। इसके अलावा दिव्यांगजनों द्वारा बनाए गए उत्पादों की गुणवत्ता, उपयोगिता और बाजार क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
मंत्रालय की योजना इस मेले को धीरे-धीरे एक बड़े राष्ट्रीय मंच के रूप में विस्तार देने की है। भविष्य के ऐसे आयोजनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अतिरिक्त एनसीएससी-डीए केंद्रों के उत्पाद और शिल्प भी प्रदर्शित होने की उम्मीद है।
एनसीएससी-डीए दिव्यांगजनों के व्यावसायिक पुनर्वास के लिए मंत्रालय का विशेष विंग है। वर्तमान में देश भर में 24 एनसीएससी-डीए केंद्र करियर परामर्श, व्यावसायिक मार्गदर्शन, अनौपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण, प्लेसमेंट सहायता और आउटरीच सेवाएं देते हैं। प्रशिक्षण में ड्रेस-मेकिंग, सिलाई, बुनाई और कढ़ाई, लकड़ी का काम, कंप्यूटर एप्लीकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सामान्य यांत्रिकी जैसे ट्रेड शामिल हैं।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB)

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