31 अक्टूबर 2026 | पर्यावरण मंत्रालय 29-30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में तटीय लचीलेपन पर राष्ट्रीय कार्यशाला कर रहा है। जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी ...
31 अक्टूबर 2026 | पर्यावरण मंत्रालय 29-30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में तटीय लचीलेपन पर राष्ट्रीय कार्यशाला कर रहा है। जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना के तहत आयोजित इस कार्यशाला में दिशा-निर्देशों पर चर्चा होगी।

- 29-30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यशाला
- जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना के तहत तटीय इकोसिस्टम की बहाली पर चर्चा
- कार्यशाला में लगभग 150 प्रतिभागी; दिशा-निर्देश तैयार करने की उम्मीद
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय 29-30 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में ‘ऐनहेंसिंग कोस्टल रीजीलिएंस थ्रू अडेप्टिव स्ट्रेटेजीज’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित कर रहा है। यह कार्यशाला हरित जलवायु कोष (जीसीएफ) की परियोजना ‘भारत के तटीय समुदायों की जलवायु अनुकूलन क्षमता को बढ़ाना’ (जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी) के तहत हो रही है।
परियोजना का उद्देश्य अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की आजीविका सुधारना और मैंग्रोव, तटीय जलग्रहण क्षेत्र, समुद्री घास, लवणीय दलदली क्षेत्र और प्रवाल भित्तियों जैसे तटीय इकोसिस्टम को बहाल करना है।
उद्घाटन सत्र में मंत्रालय के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने कहा कि तूफान जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने की तटीय समुदायों की क्षमता मजबूत करना और आजीविका की सुरक्षा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत ने तटरेखा परिवर्तन, खतरे की रेखा के मानचित्रण और तटीय संवेदनशीलता के आकलन से तटीय नियोजन का वैज्ञानिक आधार मजबूत किया है। अब इस साक्ष्य का उपयोग राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर नियोजन, बुनियादी ढांचे और निवेश के निर्णयों में होना चाहिए।
श्री भूषण ने बताया कि राष्ट्रीय तटीय मिशन, जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना के परिणामों के आधार पर, तटीय लचीलेपन और अनुकूलन संबंधी पहलों में प्रमुख भूमिका निभाएगा। वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार सुश्री राजश्री रे ने स्वागत भाषण में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में परियोजना की प्रगति का उल्लेख किया। कार्यशाला में ‘क्लाइमेट चैंपियन’ मॉडल भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से तटीय समुदायों की महिलाएँ (ईसीआरआईसीसी दीदी) स्थानीय स्तर पर जलवायु कार्रवाई की जानकारी पहुँचा रही हैं।
संयुक्त सचिव सुश्री तन्वी गर्ग ने तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से राष्ट्रीय तटीय मिशन का महत्व रेखांकित किया। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) भारत की रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव डॉ. एंजेला लुसिगी ने कहा कि तटीय इकोसिस्टम का पुनर्स्थापन आजीविका में अहम भूमिका निभाता है और इससे महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद मिलती है। द नेचर कंजर्वेंसी इंडिया के अंतरिम प्रबंध निदेशक डॉ. सुशील सहगल ने ज्ञान के आदान-प्रदान के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में लगभग 150 प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, यूएनडीपी और द नेचर कंजर्वेंसी के प्रतिनिधि, तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वन विभाग, अनुसंधान संस्थान, गैर-सरकारी संगठन, वित्तीय संस्थान और परोपकारी संगठन शामिल थे।
कार्यशाला से मिली सिफारिशों से अनुकूलन आधारित तटीय लचीलेपन के लिए व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। ये दिशा-निर्देश मौजूदा राष्ट्रीय नीतियों और कार्यक्रमों, राज्यों की प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन के अनुभवों पर आधारित होंगे। यह प्रधानमंत्री की ब्लू रिवोल्यूशन (नीली क्रांति) और महासागर अर्थव्यवस्था की परिकल्पना के अनुरूप होगा।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB)

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