30 अक्टूबर 2026 | राजस्थान के 27 वर्षीय स्वच्छता कर्मी रमेश कुमार को वर्ष 2025 में एनएएमएएसटीई योजना के तहत पीपीई किट और सेफ्टी किट मिली। ...
30 अक्टूबर 2026 | राजस्थान के 27 वर्षीय स्वच्छता कर्मी रमेश कुमार को वर्ष 2025 में एनएएमएएसटीई योजना के तहत पीपीई किट और सेफ्टी किट मिली। जानिए उनकी कहानी।

- वर्ष 2025 में रमेश कुमार को एनएएमएएसटीई योजना के तहत पीपीई किट और सेफ्टी किट मिली
- सीवर कर्मी के रूप में काम में खतरे थे और पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की कमी थी
- सुरक्षा उपकरण मिलने से जोखिम कम हुआ और आजीविका की सुरक्षा मजबूत हुई
राजस्थान के 27 वर्षीय स्वच्छता कर्मी रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (एनएएमएएसटीई) योजना की सहायता से सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की विज्ञप्ति में उनके सफर को सामने रखा गया है। इसमें बताया गया है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा, श्रम की गरिमा और संस्थागत सहयोग स्वच्छता कर्मियों के जीवन को बेहतर बनाने में अहम हैं।
रमेश आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। उन्हें आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सीवर कर्मी के रूप में उनके काम में कई तरह के व्यावसायिक खतरे थे। उन्हें असुरक्षित परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) की कमी से उनके दैनिक कार्यों से जुड़े जोखिम और बढ़ जाते थे।
वर्ष 2025 में एनएएमएएसटीई योजना के अंतर्गत रमेश को कार्यस्थल पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक पीपीई किट और सेफ्टी किट मिली। इससे उन्हें अपने काम के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरण मिले। विज्ञप्ति के अनुसार, इससे सुरक्षित तरीके से काम करने के महत्व को बल मिला।
विज्ञप्ति के अनुसार, सुरक्षा उपकरण मिलने के बाद रमेश अधिक आत्मविश्वास के साथ काम कर पा रहे हैं। इससे कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख चिंताओं को दूर करने में मदद मिली है और काम के दौरान जोखिम का खतरा कम हुआ है। इस सहायता से उनकी आजीविका की सुरक्षा भी मजबूत हुई है और परिवार के जीवन-स्तर में सुधार की बात कही गई है।
विज्ञप्ति के अनुसार, एनएएमएएसटीई योजना स्वच्छता कर्मियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। योजना के तहत सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने, काम करने के बेहतर तरीके अपनाने और स्वच्छता कर्मियों के कल्याण पर ध्यान देने का प्रयास किया गया है।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB)

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