31 अक्टूबर 2026 | केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मंडपम में ईएसटीआईसी 2026 के समापन सत्र में विकसित भारत 2047 के लिए तकनीक से बद...
31 अक्टूबर 2026 | केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मंडपम में ईएसटीआईसी 2026 के समापन सत्र में विकसित भारत 2047 के लिए तकनीक से बदलाव का आह्वान किया और दो दस्तावेज जारी हुए।

- ईएसटीआईसी 2026 के समापन सत्र में डॉ. जितेंद्र सिंह ने तकनीक से बदलाव का आह्वान किया
- दो दस्तावेज जारी: राष्ट्रीय दृष्टिकोण और भारत का एसटीआई आउटलुक 2026
- स्वदेशी अनुसंधान और उद्योग-शिक्षा जगत के सहयोग पर जोर
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मंडपम में “इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव” (ईएसटीआईसी) 2026 के समापन सत्र में प्रौद्योगिकी के माध्यम से बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लिए स्पष्ट और तय लक्ष्यों पर काम करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सुझाव को दोहराया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक खोजों के व्यावहारिक उपयोग पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत के अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम की सफलता का आकलन राष्ट्रीय विकास और विकसित भारत 2047 में उसके ठोस योगदान से होना चाहिए। उन्होंने अगले तीन वर्षों के लिए स्पष्ट और तय लक्ष्य पहचानने पर बल दिया। उन्होंने स्वदेशी अनुसंधान, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच मजबूत सहयोग और तकनीकों को समयबद्ध तरीके से सामाजिक समाधानों में बदलने का आह्वान किया।
समापन सत्र में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद सहित कई सचिव और महानिदेशक उपस्थित थे। इनमें डीएसआईआर और सीएसआईआर की सचिव एवं महानिदेशक डॉ. (श्रीमती) एन. कलाईसेल्वी, डीबीटी के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, डीएसटी के सचिव प्रोफेसर उमेश वी. वाघमारे, एमओईएस के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला और डीएआरई के सचिव तथा आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट शामिल थे। सत्र में ईएसटीआईसी 2026 से निकले मुख्य सुझावों पर प्रस्तुतियां दी गईं।
इस अवसर पर दो दस्तावेज जारी किए गए: विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिए राष्ट्रीय दृष्टिकोण तथा भारत का एसटीआई आउटलुक 2026। राष्ट्रीय दृष्टिकोण दस्तावेज 12 विषयगत क्षेत्रों में 12 मंत्रालयों और विभागों की दीर्घकालिक प्राथमिकताओं को एक साथ लाता है। एसटीआई आउटलुक भारत के विकसित हो रहे विज्ञान और नवाचार इकोसिस्टम का साक्ष्य-आधारित विवरण देता है और इसे हर वर्ष अपडेट किया जाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ईएसटीआईसी को धीरे-धीरे विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त वैज्ञानिक मंच बनना चाहिए। उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को एक साथ लाने के लिए आयोजकों की सराहना की। साथ ही उन्होंने भारत की अनुसंधान प्राथमिकताओं में स्वदेशी संसाधनों, पद्धतियों और प्रौद्योगिकियों पर अधिक ध्यान देने और विज्ञान प्रशासन में क्षमता विकास मजबूत करने पर बल दिया।
उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी, जीनोमिक्स और अंतरिक्ष अनुसंधान में हो रहे विकास का उल्लेख किया। उन्होंने स्पेस मेडिसिन सहित भविष्य की वैज्ञानिक जरूरतों का पहले से अनुमान लगाने की बात कही। न्यूक्लियर मेडिसिन सहित परमाणु विज्ञान के उपयोग को स्वास्थ्य सेवा तक फैलाने, तथा महासागर विज्ञान और ब्लू इकोनॉमी के महत्व और किफायती एवं सुलभ पोषण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाए रखने पर भी उन्होंने जोर दिया।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद ने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल खोजों तक सीमित न रहकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान देना होना चाहिए। एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर सत्र में डॉ. एन. कलाईसेल्वी ने प्रमुख निष्कर्ष रखे। चर्चा में उद्योग और प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग, ग्रामीण और वंचित समुदायों तक समाधान पहुँचाने और विशेष विनिर्माण क्षमताओं के विकास पर जोर दिया गया।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB)

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