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प्रदेश की 100 प्रतिभाओं के महासंगम में डॉ. रूपेन्द्र कवि को ‘छत्तीसगढ़ गौरव अवार्ड’
छत्तीसगढ़ की बौद्धिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक उपलब्धियों को सम्मानित करने वाले एक राज्य स्तरीय समारोह में प्रख्यात मानवशास्त्री, साहित्यकार तथा राज्यपाल सचिवालय (लोक भवन) के संवैधानिक प्रकोष्ठ के उप सचिव डॉ. रूपेन्द्र कवि को प्रतिष्ठित ‘छत्तीसगढ़ गौरव अवार्ड’ से अलंकृत किया गया। रायपुर के सिविल लाइंस स्थित वृंदावन सभागृह में आयोजित इस समारोह में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की 100 विशिष्ट प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
दैनिक समाचार पत्र ‘दबंग स्वर’ के छठे स्थापना दिवस के अवसर पर ‘वक्ता मंच’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. कवि को उनके अकादमिक एवं प्रशासनिक योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं की मौजूदगी ने समारोह को व्यापक प्रादेशिक स्वरूप प्रदान किया।
विशिष्ट अतिथियों ने प्रदान किया सम्मान
समारोह के मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित नृ-कृषि वैज्ञानिक एवं सेंट्रल हर्बल प्रोडक्ट काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजाराम त्रिपाठी थे। इस अवसर पर ‘दबंग स्वर’ के प्रधान संपादक पंडित पी. के. तिवारी, ‘वक्ता मंच’ के अध्यक्ष राजेश पराते, सम्मान समारोह के संयोजक शुभम साहू तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
अतिथियों ने संयुक्त रूप से डॉ. रूपेन्द्र कवि को स्मृति चिह्न एवं सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश के उन व्यक्तित्वों के योगदान को रेखांकित करना था, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाई है।
बस्तर की लोक-संस्कृति और शोध कार्यों की चर्चा
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने डॉ. रूपेन्द्र कवि के व्यक्तित्व में प्रशासनिक अनुशासन और जनजातीय लोक-संस्कृति के अकादमिक अध्ययन के समन्वय को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने बस्तर की मुरिया, भतरा और धुरवा जनजातियों की गोदना कला परंपरा तथा स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों (Indigenous Knowledge Systems—IKS) पर उनके क्षेत्राधारित नृवंशविज्ञान संबंधी शोध का उल्लेख किया।
वक्ताओं के अनुसार, जनजातीय समुदायों की पारंपरिक कलाओं, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों और पीढ़ियों से संचित ज्ञान का दस्तावेजीकरण छत्तीसगढ़ की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्त्वपूर्ण है। ऐसे अध्ययन स्थानीय परंपराओं को अकादमिक विमर्श से जोड़ने और उन्हें व्यापक पहचान दिलाने में भूमिका निभा सकते हैं।
“यह पुरस्कार केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और बस्तर के उन स्वदेशी समाजों की सांस्कृतिक चेतना तथा अंतर्निहित कलात्मक मेधा का सम्मान है, जिनके बीच रहकर मैंने शोध की साधना की है।”
— डॉ. रूपेन्द्र कवि, सम्मान ग्रहण करने के पश्चात
‘यह सम्मान बस्तर के समाजों को समर्पित’
सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने उद्बोधन में डॉ. रूपेन्द्र कवि ने आयोजक मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत सफलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, बस्तर के स्वदेशी समुदायों की सांस्कृतिक चेतना, पारंपरिक ज्ञान और कलात्मक प्रतिभा ही उनके शोध कार्यों की प्रेरणा रही है।
उनका यह वक्तव्य जनजातीय समाजों की सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन में स्थानीय समुदायों की भूमिका और उनके योगदान को स्वीकार करने की आवश्यकता की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है।
छह वर्षों की यात्रा और 100 प्रतिभाओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान ‘दबंग स्वर’ के प्रधान संपादक पंडित पी. के. तिवारी ने समाचार पत्र की छह वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। वक्ता मंच के अध्यक्ष राजेश पराते और समारोह के संयोजक शुभम साहू ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 100 प्रतिभाओं का सम्मान करना उनके लिए गौरव का विषय है।
समारोह में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, संवैधानिक विशेषज्ञों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों तथा अन्य गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने प्रदेश की प्रतिभाओं के योगदान को सार्वजनिक मंच पर रेखांकित करने का अवसर प्रदान किया।

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