Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

शराब मामले में सुपरवाइजर और सेल्समैन समेत शिक्षक गिरफ्तार, बस्तर में भी सुपरवाइजर-सैल्समैन से जुड़ी शिकायतों पर लंबित कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

शराब मामले में शिक्षक समेत सुपरवाइजर और सेल्समैन गिरफ्तार, बस्तर में भी शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल आर्टि...

शराब मामले में शिक्षक समेत सुपरवाइजर और सेल्समैन गिरफ्तार, बस्तर में भी शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
आर्टिगा कार से बड़ी मात्रा में देशी शराब बरामद होने की खबर — शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ | अपराध | आबकारी   |   विशेष रिपोर्ट
शराब से जुड़े एक मामले में शिक्षक समेत शराब दुकान के सुपरवाइजर और सेल्समैन की गिरफ्तारी तथा आर्टिगा वाहन से बड़ी मात्रा में देशी शराब बरामद किए जाने की खबर सामने आई है। घटना के बाद शराब दुकानों की निगरानी और विभागीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शराब से संबंधित मामले में एक शिक्षक सहित शराब दुकान से जुड़े सुपरवाइजर और सेल्समैन को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान आर्टिगा कार से बड़ी मात्रा में देशी शराब बरामद किए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि बरामद शराब कहां से लाई गई थी, उसका उद्देश्य क्या था और इस पूरे मामले में गिरफ्तार व्यक्तियों की वास्तविक भूमिका क्या रही।

गिरफ्तारी के बाद शराब दुकानों की निगरानी पर सवाल

इस घटनाक्रम ने सरकारी शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों की गतिविधियों, स्टॉक और बिक्री की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभागीय तंत्र की होती है।

ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित दुकान में नियमित निरीक्षण कब-कब हुआ, स्टॉक का मिलान किस प्रकार किया गया और क्या पूर्व में किसी प्रकार की शिकायत अथवा अनियमितता की जानकारी विभाग के संज्ञान में आई थी।

बस्तर संभाग से भी लगातार शिकायतों का दावा

इस मामले के बीच बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में संचालित शराब दुकानों को लेकर सामने आने वाली शिकायतों पर भी ध्यान जाना स्वाभाविक है। स्थानीय स्तर पर समय-समय पर शराब दुकानों के सुपरवाइजर और सेल्समैन से संबंधित शिकायतें सामने आने की बातें कही जाती रही हैं।

सवाल यह है: यदि शिकायतें विभाग अथवा पुलिस के संज्ञान में पहुंची हैं, तो उन शिकायतों पर अब तक कितनी जांच हुई और कितने मामलों में कार्रवाई की गई?

बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से सुपरवाइजर और सेल्समैन को लेकर अनेक शिकायतें सामने आने के बावजूद, शिकायतकर्ताओं के अनुसार कई मामलों में अब तक अपेक्षित विभागीय अथवा पुलिस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है। इसलिए शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

क्या केवल कर्मचारी या पूरी व्यवस्था की जांच?

शराब दुकान से संबंधित किसी भी अनियमितता की जांच केवल सेल्समैन या सुपरवाइजर तक सीमित रखने के बजाय पूरी व्यवस्था की जांच की आवश्यकता हो सकती है।

इसमें दुकान का स्टॉक रजिस्टर, वास्तविक स्टॉक, बिक्री का रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, निरीक्षण रिपोर्ट तथा पूर्व में प्राप्त शिकायतों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

जांच के प्रमुख बिंदु
  • पिछले एक वर्ष में प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड
  • सुपरवाइजर और सेल्समैन के विरुद्ध शिकायतों की स्थिति
  • शिकायतों पर की गई विभागीय जांच
  • पुलिस को भेजे गए मामलों का विवरण
  • स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक का मिलान
  • ओवररेटिंग संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई
  • शराब दुकानों के CCTV और निरीक्षण रिकॉर्ड
  • संबंधित अधिकारियों की निगरानी एवं जवाबदेही

विभाग और पुलिस से जवाब की अपेक्षा

ताजा घटनाक्रम के बाद बस्तर संभाग में शराब दुकानों से जुड़ी पुरानी शिकायतों की स्थिति भी सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता महसूस होती है।

कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं? कितनी शिकायतों की जांच हुई? कितने मामलों में विभागीय कार्रवाई की गई? कितने मामलों में पुलिस को सूचना दी गई? और कितने मामले अभी लंबित हैं—इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए।

यदि किसी शिकायत में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप जांच में निराधार पाए जाते हैं तो शिकायत की वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

अब निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता जरूरी

शराब कारोबार से संबंधित मामलों में कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय पूरे तंत्र की पारदर्शिता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। बस्तर संभाग के जिलों में शराब दुकानों की शिकायतों और निरीक्षण व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

ताजा मामला इस बात की याद दिलाता है कि सरकारी शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसकी समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है। साथ ही शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Disclaimer: समाचार में उल्लिखित आरोप एवं शिकायतें संबंधित जांच/आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं। किसी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किए जाने से पूर्व दोषी घोषित नहीं किया गया है। संबंधित विभाग, पुलिस अथवा अन्य पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रकाशित किया जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं

Girl in a jacket