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₹10 में मिलेगा हेलमेट, लोहंडीगुड़ा में हेलमेट बैंक शुरू | Bastar News

बस्तर | सड़क सुरक्षा लोहंडीगुड़ा में 'हेलमेट बैंक' की शुरुआत, ₹10 में मिलेगी सड़क सुरक्षा की सुविधा ...

बस्तर | सड़क सुरक्षा

लोहंडीगुड़ा में 'हेलमेट बैंक' की शुरुआत, ₹10 में मिलेगी सड़क सुरक्षा की सुविधा

अस्पताल चौक के पास पहला केंद्र शुरू; ग्रामीणों और राहगीरों को यात्रा के लिए उपलब्ध होगा हेलमेट

ग्रामीण इलाकों में दोपहिया वाहनों से सफर करने वालों के सामने अक्सर हेलमेट उपलब्ध नहीं होने की समस्या रहती है। इसी व्यावहारिक समस्या को ध्यान में रखते हुए बस्तर जिले की जनपद पंचायत लोहंडीगुड़ा ने 'हेलमेट बैंक' शुरू किया है। पहल का उद्देश्य ग्रामीणों और राहगीरों को यात्रा के दौरान हेलमेट आसानी से उपलब्ध कराना और सड़क दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोट के जोखिम को कम करना है।

मात्र ₹10 प्रतिदिन के टोकन शुल्क पर हेलमेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

अस्पताल चौक के पास पहला केंद्र

हेलमेट बैंक का पहला केंद्र लोहंडीगुड़ा के अस्पताल चौक के पास स्थित सुरेंद्र पान भंडार में बनाया गया है। स्थान का चयन इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि यह क्षेत्र ग्रामीणों और राहगीरों की आवाजाही वाला प्रमुख स्थान है।

यहां से गुजरने वाले दोपहिया चालक अपनी जरूरत के अनुसार हेलमेट प्राप्त कर सकेंगे और यात्रा पूरी होने के बाद उसे उसी केंद्र पर वापस जमा कर सकेंगे।

हेलमेट बैंक की प्रमुख बातें

• पहला केंद्र — अस्पताल चौक, सुरेंद्र पान भंडार
• टोकन शुल्क — ₹10 प्रतिदिन
• पहचान के लिए वैध पहचान पत्र जमा करने की व्यवस्था
• यात्रा के बाद हेलमेट वापस करना होगा
• वापस आए हेलमेट को सैनिटाइज कर दोबारा उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ शुभारंभ

हेलमेट बैंक के शुभारंभ अवसर पर जनपद पंचायत उपाध्यक्ष डॉ. बसन्त कश्यप और सरपंच भरत कश्यप सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सुरेंद्र साहू, मुर्गोसेन ठाकुर, टूमन खापर्डे, विशाल ठाकुर, इन्द्रेश नागे, रमेश ठाकुर, शंकर सिंहा, भोसे पोडियामी, कमलेश ठाकुर, दुष्यन्त कश्यप और बंधूलाल जायसवाल सहित अन्य ग्रामीण एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

चालान के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता

ग्रामीण अंचलों में कई लोग जागरूकता की कमी, हेलमेट साथ नहीं होने या नया हेलमेट खरीदने में होने वाले खर्च के कारण बिना हेलमेट यात्रा करते हैं। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान यह स्थिति दुर्घटना की स्थिति में गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

हेलमेट बैंक की अवधारणा इसी व्यवहारिक समस्या का समाधान करने की कोशिश है। इसका जोर केवल यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने के बजाय लोगों को सुरक्षा का सहज विकल्प उपलब्ध कराने पर है।

सड़क सुरक्षा केवल चालान और जुर्माने का विषय नहीं है। सुरक्षित यात्रा के लिए जरूरी साधन लोगों की पहुंच में होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

छोटी पहल, बड़ा संदेश

लोहंडीगुड़ा में शुरू किया गया यह हेलमेट बैंक ग्रामीण क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर एक उपयोगी स्थानीय प्रयोग के रूप में देखा जा सकता है। खासतौर पर उन लोगों के लिए, जिन्हें किसी आकस्मिक यात्रा या लंबी दूरी के सफर के दौरान हेलमेट की आवश्यकता होती है, यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

यदि यह मॉडल प्रभावी ढंग से संचालित होता है और हेलमेट की उपलब्धता, स्वच्छता तथा वापसी की व्यवस्था लगातार बनी रहती है, तो इसे बस्तर के अन्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। सड़क सुरक्षा के लिहाज से ऐसी स्थानीय पहलों की सफलता का वास्तविक पैमाना यही होगा कि कितने लोग बिना किसी दबाव के हेलमेट पहनकर सुरक्षित यात्रा करने लगते हैं।

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