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चंदनपुर में बढ़ते जलस्तर और प्रभावितों की चिंता कर पहुंचे डॉ. बसंत कश्यप
लोहंडीगुड़ा। क्षेत्र में बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति की सूचना मिलते ही जनपद पंचायत लोहंडीगुड़ा के उपाध्यक्ष डॉ. बसंत कश्यप अपने साथियों के साथ चंदनपुर पहुंचे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया।
मौके पर पहुंचकर डॉ. कश्यप ने प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद किया और उनकी स्थिति तथा आवश्यकताओं की जानकारी ली। जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने तथा किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाने की अपील की।
राहत कैंप में जाने का आग्रह
डॉ. बसंत कश्यप ने बाढ़ प्रभावित लोगों से आग्रह किया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन द्वारा निर्धारित राहत कैंप अथवा सुरक्षित स्थान पर जाने में देरी न करें। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। ऐसे में नदी, नालों तथा जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचना जरूरी है। उन्होंने ग्रामीणों से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।
युवा साथियों से सजग रहने की अपील
डॉ. कश्यप ने क्षेत्र के युवा साथियों से भी विशेष रूप से सजग रहने और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में स्थानीय युवाओं की तत्परता राहत एवं सहायता कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हालांकि उन्होंने युवाओं से राहत कार्यों के दौरान अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखने को कहा। उनका कहना था कि किसी भी परिस्थिति में तेज बहाव वाले पानी अथवा जोखिम वाले स्थानों पर स्वयं की जान को खतरे में डालकर सहायता का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
प्रभावितों के साथ खड़े रहने का संदेश
चंदनपुर में प्रभावित परिवारों से बातचीत के दौरान डॉ. कश्यप ने भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में स्थानीय स्तर पर हरसंभव सहयोग का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से आपसी समन्वय बनाए रखने और किसी भी महत्वपूर्ण सूचना को तत्काल संबंधित प्रशासन तक पहुंचाने की अपील की।
बढ़ते जलस्तर के बीच चंदनपुर में डॉ. बसंत कश्यप की मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से बातचीत और उन्हें सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए प्रेरित करने की पहल को स्थानीय स्तर पर राहत एवं बचाव प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









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