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मानवता और पारंपरिक अर्थव्यवस्था का संरक्षण ही विकास की असली कुंजी: डॉ. रूपेन्द्र कवि
रायपुर। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के स्कूल ऑफ स्टडीज इन इकोनॉमिक्स (अर्थशास्त्र अध्ययनशाला) में विभागीय आर्थिक परिषद (DEC) के उद्घाटन एवं नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण समारोह का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभवन के संवैधानिक प्रकोष्ठ के उप सचिव, मानववैज्ञानिक, साहित्यकार एवं परोपकारी डॉ. रूपेन्द्र कवि विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। माँ सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
समारोह में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति डॉ. रोहिणी प्रसाद तथा वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. रविंद्र ब्रह्मर्षि भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अर्थशास्त्र के केंद्र में मानवता को रखने पर जोर
अपने उद्बोधन में डॉ. रूपेन्द्र कवि ने अर्थशास्त्र को केवल आंकड़ों, उत्पादन और बाजार तक सीमित न रखते हुए उसके मानवीय पक्ष को प्रमुखता देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विकास की अवधारणा में समाज के वंचित वर्गों, गरीबों और आदिवासी समुदायों की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को केंद्र में रखना आवश्यक है।
उन्होंने विशेष रूप से पारंपरिक अर्थव्यवस्था प्रणाली के संरक्षण और उसके साथ आधुनिक विकास के संतुलन पर जोर दिया। उनके अनुसार, स्थानीय ज्ञान, पारंपरिक आजीविका और समुदाय आधारित आर्थिक व्यवस्थाओं को संरक्षित करते हुए सस्टेनेबल ग्रोथ की दिशा में आगे बढ़ना समकालीन अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
विद्यार्थियों के नेतृत्व विकास का मंच बनी आर्थिक परिषद
विभागीय आर्थिक परिषद के गठन का उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों के अतिरिक्त संवाद, विचार-विमर्श, नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने के लिए एक सक्रिय मंच उपलब्ध कराना है।
- अध्यक्ष: निलेश साहू — एम.ए. तृतीय सेमेस्टर
- उपाध्यक्ष: चंचल वर्मा — एम.ए. तृतीय सेमेस्टर
- सचिव: निकिता चौधरी — एम.ए. प्रथम सेमेस्टर
- संयुक्त सचिव: हर्षिका साहू — एम.ए. प्रथम सेमेस्टर
शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन काउंसिल इंचार्ज प्रो. सुनील कुमेती ने किया। विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. सोनकर ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर डॉ. रोहिणी प्रसाद, वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. रविंद्र ब्रह्म, डॉ. अर्चना सेठी, डॉ. कपिल कुमार चंद्रा एवं डॉ. प्रगति कृष्णन सहित अध्ययनशाला के अन्य शिक्षकों की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।
समारोह के समापन अवसर पर आयोजकों द्वारा विशिष्ट अतिथि डॉ. रूपेन्द्र कवि को शाल, श्रीफल एवं श्रीमद्भगवद्गीता की प्रति भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में एम.ए. प्रथम सेमेस्टर सहित अध्ययनशाला के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में सामने आया विचार-विमर्श अर्थशास्त्र को केवल आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों के बजाय मानव कल्याण, सामाजिक समावेशन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर केंद्रित रहा। विभागीय आर्थिक परिषद विद्यार्थियों को इन विषयों पर अकादमिक संवाद और नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक संस्थागत मंच के रूप में कार्य कर सकती है।





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