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CGPSC गड़बड़ी मामले में कारोबारी उत्कर्ष चंद्राकर से ED की पूछताछ, 16 से अधिक लोगों को नोटिस

• जांच में चयन के कथित लेन-देन की कड़ी विकास से अनिल और फिर उत्कर्ष तक पहुंचने का दावा, सात अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ वसूली का आरोप : राय...

जांच में चयन के कथित लेन-देन की कड़ी विकास से अनिल और फिर उत्कर्ष तक पहुंचने का दावा, सात अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ वसूली का आरोप :

रायपुर : CGPSC भर्ती गड़बड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी कारोबारी उत्कर्ष चंद्राकर से पूछताछ कर रही है। मामले में ED ने 16 से अधिक लोगों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें अधिकांश अभ्यर्थी हैं, जबकि कुछ कारोबारी और प्रॉपर्टी डीलर भी जांच के दायरे में हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, चयन के लिए कथित लेन-देन की कड़ी महासमुंद के डॉ. विकास चंद्राकर से अनिल चंद्राकर और फिर उत्कर्ष चंद्राकर तक पहुंची। आरोपों के मुताबिक, डॉ. विकास अपनी बहन का चयन कराने का प्रयास कर रहे थे। उनके रिश्तेदार अंकित ने उनकी मुलाकात अनिल चंद्राकर से कराई, जिसके बाद अनिल उन्हें उत्कर्ष के पास लेकर गया।

जांच के अनुसार, उत्कर्ष ने खुद को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पीए केके चंद्रवंशी का रिश्तेदार और तत्कालीन ओएसडी चेतन बोरघरिया का करीबी बताते हुए चयन कराने का दावा किया था। कथित तौर पर इसके लिए प्रति अभ्यर्थी 50 से 60 लाख रुपये की मांग की गई।

इसके बाद विकास चंद्राकर ने CGPSC की तैयारी कर रहे दो दर्जन से अधिक युवाओं से संपर्क किया और उन्हें उत्कर्ष से मिलवाया। ED की जांच के मुताबिक, कथित सौदा तय होने के बाद अभ्यर्थियों से रकम लेकर उत्कर्ष और अनिल तक पहुंचाई गई।


सात अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपये लेने का दावा

ED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर ने सात अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपये वसूले। जांच में यह भी दावा किया गया है कि 29 अभ्यर्थियों को बारनवापारा स्थित सिद्धि विनायक पैलेस रिसॉर्ट में परीक्षा की तैयारी के नाम पर जुटाया गया था। इनमें से 18 अभ्यर्थियों के नाम पहले सामने आ चुके हैं। जांच में इन्हें नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों के रिश्तेदार बताए जाने का दावा किया गया है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, विकास चंद्राकर को CBI ने सरकारी गवाह बनाया है। वहीं सुषमा अग्रवाल ने भी उत्कर्ष के खिलाफ बयान दिया है।


टामन सोनवानी से जुड़े कथित लेन-देन की भी जांच

जांच में तत्कालीन PSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी से जुड़े कथित लेन-देन का भी उल्लेख किया गया है। जांच के मुताबिक, बजरंग पावर के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल के बेटे और बहू का चयन कराने के लिए कथित तौर पर प्रति अभ्यर्थी 45-45 लाख रुपये का सौदा हुआ था। दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर होने की बात जांच में सामने आने का दावा किया गया है।

एक अभ्यर्थी के चयन के बदले गोयल की कंपनी के खाते से 45 लाख रुपये दिए जाने का भी दावा है। इस राशि को रिश्वत के बजाय CSR फंड के रूप में दिखाए जाने की बात कही गई है। यह रकम सोनवानी की पत्नी से जुड़े एक NGO के खाते में भेजे जाने का दावा किया गया है। उक्त NGO सोनवानी के पैतृक गांव में संचालित बताया गया है।

ED ने जांच में कई कारोबारियों और नेताओं से जुड़े कथित मनी ट्रेल मिलने का दावा किया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदारों के चयन के लिए रकम दी।


2020 से 2023 तक की अन्य भर्तियां भी जांच के दायरे में

उत्कर्ष चंद्राकर से प्रारंभिक पूछताछ के बाद 2020 से 2023 के बीच आयोजित CGPSC की अन्य परीक्षाओं और भर्तियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। इनमें प्रोफेसर भर्ती भी शामिल है।

राज्य सरकार ने फिलहाल 2021 की राज्य सेवा परीक्षा की जांच के निर्देश दिए थे। अन्य परीक्षाओं की अलग से जांच नहीं कराई गई थी। जांच के दायरे में एक ऐसा मामला भी बताया गया है, जिसमें एक ही परीक्षा केंद्र से 38 अभ्यर्थियों के चयन की बात सामने आई है।

हालांकि, मामले में सामने आए आरोप और जांच एजेंसियों के दावे अभी जांच का हिस्सा हैं। संबंधित आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

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