"मिशनरी हस्तक्षेप के विरोध में उभरा जनआक्रोश, चित्रकोट में अंतिम संस्कार को लेकर दिनभर चला तनाव" जगदलपुर। बस्तर संभाग के लोहंडीग...
"मिशनरी हस्तक्षेप के विरोध में उभरा जनआक्रोश, चित्रकोट में अंतिम संस्कार को लेकर दिनभर चला तनाव"
जगदलपुर। बस्तर संभाग के लोहंडीगुड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चित्रकोट के पदरगुड़ापारा में एक धर्मांतरित व्यक्ति के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। गांव के सार्वजनिक मुक्तिधाम में शव दफनाने के प्रयास का ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध किया, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में दिनभर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। मामला बढ़ने पर प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः शव को मसीही कब्रिस्तान में दफनाया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। ग्रामीणों का कहना था कि गांव का सार्वजनिक मुक्तिधाम पारंपरिक रूप से स्थानीय जनजातीय और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उपयोग में लाया जाता रहा है और वहां धर्मांतरित व्यक्ति का दफन किया जाना गांव की परंपराओं के विरुद्ध है। विरोध बढ़ने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के समर्थन में प्रदर्शन किया।
माहरा समाज के चित्रकोट परगना अजय बघेल ने आरोप लगाया कि मिशनरी संगठन योजनाबद्ध तरीके से गांवों में हस्तक्षेप कर सामाजिक संरचना को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों और स्थानीय नेतृत्व पर प्रभाव बनाकर ग्रामीणों के मतांतरण की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
वहीं बजरंग दल के विभाग संयोजक एवं माहरा समाज के युवा नेता सिकंदर कश्यप ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के बावजूद इस प्रकार के विवादित मामलों में संवेदनशीलता नहीं बरती जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर हिंदू मुक्तिधामों में दफनाने का प्रयास कर सामाजिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं पर भी मिशनरियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों, माटी पुजारी, नाईक, सिरहा-गुनिया सहित पारंपरिक सामाजिक प्रहरियों ने भी वर्तमान सरपंच पर मिशनरियों का समर्थन करने का आरोप लगाया। पूर्व सरपंच रैतूराम कश्यप सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि गांव की पुरानी परंपराओं और सामाजिक नियमों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप था कि पहले राजनीतिक प्रभाव स्थापित किया जाता है और बाद में सामाजिक परंपराओं को बदलने का प्रयास किया जाता है।
दिनभर चले विरोध और बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। प्रशासन की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई। इसके बाद मृतक के छोटे भाई पुष्पेंद्र बघेल ने लोहंडीगुड़ा तहसीलदार को लिखित आवेदन देकर शव को निकट स्थित मसीही कब्रिस्तान में दफनाने की सहमति दी। परिजनों की सहमति के बाद विवाद शांत हुआ और शव को मसीही कब्रिस्तान ले जाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
घटना के दौरान विश्व हिंदू परिषद के विभाग सेवा प्रमुख अनिल अग्रवाल, बजरंग दल जिला संयोजक विष्णु ठाकुर, सह संयोजक योगेश रैली, पूर्व जिला संयोजक मुन्ना बजरंगी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद




कोई टिप्पणी नहीं