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मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक पर कांग्रेस का हमला, सुशील मौर्य बोले— बस्तर को मिला सिर्फ “गाय-भैंस का दिलासा”

  "मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक पर कांग्रेस का हमला," सुशील मौर्य बोले— बस्तर को मिला सिर्फ “गाय-भैंस का  दिलासा" जगदलपुर, 20...

 


"मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक पर कांग्रेस का हमला," सुशील मौर्य बोले— बस्तर को मिला सिर्फ “गाय-भैंस का  दिलासा"

जगदलपुर, 20 मई 2026। (रोमेश नामदेव) बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की हाई-प्रोफाइल बैठक को लेकर राजनीति तेज हो गई है। देश के गृह मंत्री Amit Shah सहित चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी वाली इस बैठक पर बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष Sushil Maurya ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की मौजूदगी के बावजूद बस्तर की जनता के हाथ “सिर्फ एक गाय और एक भैंस का दिलासा” ही आया है।

प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए सुशील मौर्य ने कहा कि बस्तर जैसे आदिवासी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में आयोजित इस बैठक से स्थानीय लोगों, युवाओं और किसानों को बड़ी उम्मीदें थीं। लोगों को उम्मीद थी कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे और उद्योगों को लेकर कोई बड़ा ऐलान होगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बैठक केवल राजनीतिक प्रदर्शन बनकर रह गई और बस्तर की मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

कांग्रेस नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद को लेकर दिए गए हालिया बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गृह मंत्री के दावों को “सदी का सबसे बड़ा झूठ” बताते हुए कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए बस्तर की पीड़ा का इस्तेमाल कर रही है। मौर्य ने आरोप लगाया कि 50 वर्षों से नक्सल हिंसा झेल रहे बस्तर की जनता के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय भाजपा नेता राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हुए हैं।

सुशील मौर्य ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक भाजपा की सरकार रही और Raman Singh के शासनकाल में नक्सलवाद बस्तर के सीमित इलाकों से निकलकर ब्लॉक मुख्यालयों और शहरी क्षेत्रों तक फैल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण नक्सली संगठन और अधिक मजबूत हुए तथा सबसे अधिक जवानों की शहादत भी उसी दौर में हुई। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के पास नक्सलवाद खत्म करने की इच्छाशक्ति होती तो इतने लंबे शासनकाल में इसका समाधान हो चुका होता।

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद नक्सलवाद के खिलाफ “विश्वास, विकास और सुरक्षा” की त्रिसूत्रीय नीति पर काम शुरू हुआ। इसके परिणामस्वरूप अंदरूनी इलाकों में विकास कार्य पहुंचे, स्कूल दोबारा खुले, युवाओं को रोजगार मिला और नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में ही नक्सल संगठन बैकफुट पर जाने को मजबूर हुए थे।

सुशील मौर्य ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कांग्रेस पर लगाए गए “केंद्र का सहयोग नहीं करने” के आरोपों को भी निराधार बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हमेशा बस्तर की शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा को राजनीति से ऊपर रखा तथा केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा बलों की तैनाती और शांति बहाली के प्रयास किए।

उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर के बेरोजगार युवाओं को उम्मीद थी कि गृह मंत्री के दौरे के दौरान किसी विशेष रोजगार पैकेज या बड़ी विकास योजना की घोषणा की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बस्तर के नाम पर केवल राजनीति करती है, जबकि युवाओं के रोजगार और स्थानीय अधिकारों के मुद्दे पर पूरी केंद्रीय नेतृत्व चुप्पी साध लेता है।

सुशील मौर्य ने बताया कि कांग्रेस पार्टी की ओर से जल, जंगल, जमीन और स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने ज्ञापन के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार को बस्तर की वास्तविक समस्याओं और यहां की जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है।

अंत में कांग्रेस नेता ने कहा कि बस्तर की जनता अब भाजपा की राजनीति और दावों को समझ चुकी है तथा आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।

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