दुनिया व्यापार 🌍 : रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। यूरोपीय संघ (EU) के व्याप...
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दुनिया व्यापार 🌍 : रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। यूरोपीय संघ (EU) के व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविक ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका भविष्य में रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में कोई नई छूट नहीं देगा।यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद सामने आया। जानकारी के अनुसार, अब तक जो सीमित राहत दी गई थी, वह केवल कुछ गरीब और तेल आयात पर निर्भर देशों की कठिन स्थिति को देखते हुए अस्थायी तौर पर दी गई थी।
🟣 प्रतिबंधों में राहत क्यों दी गई?
हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री और लोडिंग के लिए जारी “जनरल लाइसेंस” को 16 मई तक बढ़ाया था।
बताया गया कि यह राहत होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका को देखते हुए दी गई थी। कई कम आय वाले देशों में तेल की कमी के कारण हालात गंभीर हो गए थे, इसलिए यह एक अस्थायी कदम था।
🟣 ईरान-इजरायल तनाव का असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ा है, जो बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।
🟣 भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का करीब 30-35% कच्चा तेल रूस से आयात करता है।
खाड़ी देशों से आने वाला लगभग आधा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जो अभी संवेदनशील बना हुआ है।
जब खाड़ी सप्लाई प्रभावित हुई, तब भारत ने रूस से आयात बढ़ाकर कमी पूरी की थी।
अगर अब रूसी तेल पर भी सख्ती बढ़ती है, तो भारत के पास विकल्प सीमित हो जाएंगे।
इसके अलावा, भारत उर्वरकों के लिए भी रूस और अन्य देशों पर निर्भर है। ऐसे में आपूर्ति प्रभावित होने पर खेती की लागत और खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अफ्रीका, वेनेजुएला या अमेरिका जैसे विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है, लेकिन यह विकल्प रूस की तुलना में महंगे साबित हो सकते हैं।


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