जगदलपुर : देश में तेजी से बढ़ती युवा आबादी जहां एक ओर अवसर का संकेत देती है, वहीं रोजगार के सीमित अवसर बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। उपलब्ध ...
जगदलपुर : देश में तेजी से बढ़ती युवा आबादी जहां एक ओर अवसर का संकेत देती है, वहीं रोजगार के सीमित अवसर बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ करोड़ युवा वर्कफोर्स में शामिल होते हैं, जबकि केवल करीब 30 लाख युवाओं को ही औपचारिक (फॉर्मल) सेक्टर में रोजगार मिल पाता है। शेष युवा या तो अनौपचारिक (इन्फॉर्मल) क्षेत्र में कार्यरत रहते हैं या बेरोजगारी का सामना करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2030 तक देश में लगभग 100 करोड़ युवा वर्कफोर्स का हिस्सा बन सकते हैं, ऐसे में यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
छत्तीसगढ़ की स्थिति भी इससे अछूती नहीं है। राज्य में प्रतिवर्ष 2 से 2.5 लाख युवा डिग्री प्राप्त करते हैं, लेकिन इनमें से केवल 25 से 30 हजार युवाओं को ही औपचारिक क्षेत्र में नौकरी मिल पाती है, जबकि बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार या अंडर-इम्प्लॉयमेंट की स्थिति में रहते हैं।
विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2020 से 2025 तक के आंकड़ों के अध्ययन में पाया गया कि इस अवधि में 87 हजार डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत युवा वर्कफोर्स में शामिल हुए, लेकिन केवल 12 हजार युवाओं को ही औपचारिक रोजगार प्राप्त हो सका। इससे स्पष्ट है कि बस्तर क्षेत्र में भी बेरोजगारी और अंडर-इम्प्लॉयमेंट एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर में शांति स्थापना के बाद अब युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता है, ताकि वे नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन सकें। इसी दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा नवाचार (इनोवेशन) और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मल्टीडिसिप्लिनरी पाठ्यक्रम में इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय में इनोवेशन एवं स्टार्टअप फाउंडेशन की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को प्रोटोटाइप, स्टार्टअप, मार्केटिंग, ब्रांड बिल्डिंग, वित्तीय समझ और सस्टेनेबल इनोवेशन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
हाल ही में विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न कार्यशालाओं, व्याख्यानों, एक्सपोजर विजिट और प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया। साथ ही बस्तर संभाग की लगभग 400 महिलाओं के लिए मार्केट प्लेस साक्षरता पर दो दिवसीय कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय ने कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत “एसएमकेवि इन्क्यूबेशन एंड स्टार्टअप फाउंडेशन” के नाम से एक गैर-सरकारी कंपनी का पंजीकरण भी कराया है, जो युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बस्तर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक संपदा, जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक कौशल के कारण स्टार्टअप के लिए अत्यधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र है। यदि यहां उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए, तो स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, पलायन में कमी आएगी और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रो. शरद नेमा, डॉ. विनोद कुमार सोनी, डॉ. सजीवन कुमार सहित स्वदेशी जागरण मंच के सदस्य उपस्थित रहे।




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