अबूझमाड़ की बदलती तकदीर | 4thColumn अबूझमाड़ की बदलती तकदीर: जब बंदूकों की जगह बीजों ने ली और दफ्तर ख...
अबूझमाड़ की बदलती तकदीर: जब बंदूकों की जगह बीजों ने ली और दफ्तर खुद चलकर गाँव पहुँचे
रायपुर/नारायणपुर: छत्तीसगढ़ के सुदूर दक्षिण में स्थित अबूझमाड़ अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। वर्षों तक दुर्गमता और अलगाव के प्रतीक रहे इस क्षेत्र में अब विकास की स्पष्ट पदचाप सुनाई दे रही है। प्रशासन, सुरक्षा बल और समाज की सहभागिता मिलकर इस क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं।
1. प्रशासन आपके द्वार: समाधान अब गांव में
कलेक्टर नम्रता जैन के नेतृत्व में प्रशासन ने कार्यालयों से बाहर निकलकर गांवों का रुख किया है। 30 अप्रैल 2026 तक चलने वाले जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके गांव में ही समाधान मिल रहा है।
- 10 अप्रैल – कुतुल
- 18 अप्रैल – कोहकामेटा
- 20 अप्रैल – आकाबेड़ा
- 30 अप्रैल – छोटेडोंगर
इसके अतिरिक्त गारपा, कौशलनार, दण्डवन, कस्तूरमेटा, एड़का, छिनारी, बेनूर और रेमावंड में भी शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
2. पगडंडियों पर दौड़ती संजीवनी: स्वास्थ्य में नई उम्मीद
1 अप्रैल 2026 को 09 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाई गई। इनमें 08 BLS और 01 ALS एंबुलेंस शामिल हैं।
ये एंबुलेंस अब दुर्गम क्षेत्रों में ‘गोल्डन ऑवर’ को सुरक्षित करते हुए समय पर उपचार सुनिश्चित करेंगी, जिससे मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है।
3. आईटीबीपी, सिविक एक्शन: विकास के बीज
एडजूम क्षेत्र में आईटीबीपी के सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत 201 ग्रामीणों को उन्नत बीज वितरित किए गए।
साथ ही 233 मरीजों का उपचार भी किया गया। यह पहल सुरक्षा और सेवा के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण बनी है।
4. “आओ बाँटें खुशियाँ”: संवेदनशील प्रशासन
अधिकारियों ने अपने जन्मदिन को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए बच्चों के साथ मनाया। पौष्टिक आहार वितरण और बच्चों के साथ समय बिताकर प्रशासन ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी।
5. डिजिटल छलांग: पारदर्शिता और अवसर
जिला कोषालय में ऑनलाइन ई-चालान प्रणाली शुरू की गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार में कमी आएगी।
साथ ही अग्निवीर भर्ती के लिए आवेदन तिथि 10 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई गई है, जिससे युवाओं को सेना में शामिल होने का अवसर मिल रहा है।
बदलता नारायणपुर, चमकता भविष्य
नारायणपुर की ये पहलें यह दर्शाती हैं कि जब प्रशासन, सुरक्षा बल और समाज मिलकर काम करते हैं, तो सबसे कठिन परिस्थितियां भी बदली जा सकती हैं। अबूझमाड़ अब विकास, तकनीक और संवेदनशीलता का नया उदाहरण बन रहा है।



















कोई टिप्पणी नहीं