“अपनों के नाम पत्र” के साथ डॉ. रूपेन्द्र कवि का जन्मोत्सव : स्नेह, संस्कार और संवेदना का अनुपम संगम विशेष स...
रायपुर, छत्तीसगढ़।
डिजिटल युग में तेजी से लुप्त होती पत्र लेखन की आत्मीय परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से शकुंतला फाउंडेशन द्वारा आयोजित अभिनव कार्यक्रम “अपनों के नाम पत्र” ने भावनाओं, संस्कारों और संवाद का एक सशक्त मंच प्रस्तुत किया। वरिष्ठजनों के हितार्थ आयोजित इस अनूठे आयोजन में उनकी सक्रिय और उत्साहपूर्ण सहभागिता ने इसे एक संवेदनशील सामाजिक पर्व का स्वरूप प्रदान किया।
फाउंडेशन की अध्यक्ष स्मिता सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि आधुनिक दौर में भावनाओं की अभिव्यक्ति प्रायः मोबाइल संदेशों तक सीमित होकर रह गई है, जबकि हस्तलिखित पत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मीयता, संस्कृति और संबंधों की जीवंत धरोहर होते हैं। उन्होंने इस पहल को पीढ़ियों के बीच भावनात्मक सेतु के रूप में रेखांकित किया।
डॉ. कवि अपने परिवार सहित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए और अपने उद्बोधन में वरिष्ठजनों के अनुभव को समाज की अमूल्य पूंजी बताते हुए कहा कि “बुजुर्गों का जीवनानुभव ही समाज के नैतिक मार्गदर्शन का आधार है।” उन्होंने शकुंतला फाउंडेशन की संस्थापक श्रद्धेय शकुंतला देवी एवं सभी वरिष्ठजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
उन्होंने “अपनों के नाम पत्र” की संकल्पना की विशेष सराहना करते हुए सुझाव दिया कि इस पहल को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाए, ताकि वरिष्ठजनों की संवेदनाएँ, स्मृतियाँ और जीवनानुभव स्थायी रूप से संरक्षित रह सकें। साथ ही उन्होंने इस दिशा में हर संभव सहयोग का आश्वासन भी प्रदान किया।
इस हर्षोल्लासपूर्ण अवसर पर डॉ. कवि की धर्मपत्नी, समाजसेविका एवं लेखिका मोनिका कवि ने सभी उपस्थित वरिष्ठजनों का स्नेहपूर्वक अभिनंदन करते हुए फल एवं नाश्ते का वितरण किया तथा उनके प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में शकुंतला देवी, माधुरी शुक्ला, महेश दुबे, सुषमा बग्गा, पदमा घोष, सुधा दीक्षित, स्मिता सिंह, मोनिका कवि, साहू सर एवं अमिता अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
समग्र रूप से यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वरिष्ठजनों के सम्मान, संवाद और संवेदना को समर्पित एक भावनात्मक उत्सव सिद्ध हुआ, जिसने पारंपरिक पत्र लेखन की संस्कृति को नई ऊर्जा, दिशा और सामाजिक प्रासंगिकता प्रदान की।





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