— डॉ. रूपेन्द्र कवि ने मेट्स विश्वविद्यालय में दिया राष्ट्रीय की-नोट व्याख्यान रायपुर/आरंग। प्रसिद्ध मानवविज्ञानी, साहित्यकार, समा...
— डॉ. रूपेन्द्र कवि ने मेट्स विश्वविद्यालय में दिया राष्ट्रीय की-नोट व्याख्यान
रायपुर/आरंग।
प्रसिद्ध मानवविज्ञानी, साहित्यकार, समाजसेवी एवं छत्तीसगढ़ राज्यपाल के उप सचिव डॉ. रूपेन्द्र कवि ने मेट्स विश्वविद्यालय, रायपुर (आरंग) में “The New Labour Code 2025: A Contemporary Dialogue Between Law and Social Reality” विषय पर राष्ट्रीय स्तर का की-नोट व्याख्यान दिया।
डॉ. कवि ने कहा कि श्रम कानून केवल धाराओं और परिभाषाओं का संग्रह नहीं हैं, बल्कि वे जीवंत सामाजिक दस्तावेज हैं, जो आर्थिक संरचना, सांस्कृतिक जीवन और संवैधानिक यथार्थ से गहराई से जुड़े होते हैं।
“भारत जैसे देश में, जहाँ आर्थिक विकास और सामाजिक असमानता साथ-साथ मौजूद हैं, वहाँ श्रम कानून राज्य, बाज़ार और नागरिक हितों के बीच संतुलन और टकराव का प्रमुख स्थल हैं।”
इतिहास की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि भारत में श्रम कानून परंपरागत रूप से संरक्षण आधारित रहे हैं, किंतु समय के साथ सुरक्षा और लचीलेपन के बीच संतुलन की आवश्यकता महसूस की गई। न्यू लेबर कोड 2025 इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में एक प्रयास है।
उन्होंने आधुनिक श्रमिकों, गिग इकॉनॉमी और प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक नियोक्ता–कर्मचारी संबंध आज बदल रहे हैं और सामाजिक सुरक्षा की नई सीमाएं तय करना अनिवार्य हो गया है।
छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों पर बोलते हुए डॉ. कवि ने कहा कि राज्य में श्रम मुख्यतः कृषि, खनन, वन एवं असंगठित क्षेत्रों से उत्पन्न होता है, जो केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा है।
संवैधानिक दृष्टिकोण से उन्होंने कहा कि न्यू लेबर कोड को समानता, गरिमा और जीवन के अधिकार के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए तथा इसे सामाजिक न्याय के उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए।
डॉ. कवि ने कहा कि किसी भी कानून की सफलता उसके कार्यान्वयन, न्यायिक व्याख्या और सामाजिक स्वीकृति पर निर्भर करती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव ने की। मंच पर डॉ. रमेश कुमार साहू (उप पंजीयक), डॉ. प्रशांत कुमार (विभागाध्यक्ष, मेट्स लॉ स्कूल) तथा डॉ. विचार मिश्रा (विभागाध्यक्ष, फॉरेंसिक साइंस) उपस्थित रहे।
प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों के जटिल प्रश्नों के डॉ. कवि ने स्पष्ट, व्यावहारिक और विचारोत्तेजक उत्तर दिए। अंत में विश्वविद्यालय की ओर से उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।


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