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"अ से असलहा, ब से बंदूक" की शिक्षा अब इतिहास बनी: बीजापुर में नक्सली शिक्षा तंत्र के सरगना सुधाकर का अंत

"अ से असलहा, ब से बंदूक" की शिक्षा अब इतिहास बनी: बीजापुर में नक्सली शिक्षा तंत्र के सरगना सुधाकर का अंत: बीजापुर :  की वादियों मे...


"अ से असलहा, ब से बंदूक" की शिक्षा अब इतिहास बनी: बीजापुर में नक्सली शिक्षा तंत्र के सरगना सुधाकर का अंत:

बीजापुर : की वादियों में शुक्रवार का सूरज एक नए युग की शुरुआत लेकर उगा। सुरक्षा बलों की सटीक कार्रवाई में नक्सलियों के केंद्रीय समिति सदस्य और कुख्यात एजुकेशन हेड नर सिंहाचलम उर्फ सुधाकर को ढेर कर दिया गया। यह वही सुधाकर था जिसने 'अ से अनार' नहीं, बल्कि 'अ से असलहा और ब से बंदूक' पढ़ाने की व्यवस्था बनाई थी।

सुधाकर का उद्देश्य स्पष्ट था—भटके हुए मासूमों को शिक्षा की आड़ में हिंसा की राह पर मोड़ना। उसने पूरे दंडकारण्य क्षेत्र में ऐसे शिक्षा केंद्र स्थापित किए थे, जहां किताबों की जगह बारूद का पाठ पढ़ाया जाता था। बच्चों के कोमल मन में बंदूक थमा दी जाती थी, और भविष्य के निर्माण की जगह विनाश का बीज बोया जाता था।

बीजापुर की धरती आज गर्व महसूस कर रही है कि उसने न केवल एक खूनी अध्याय का अंत देखा, बल्कि उस तंत्र को भी जड़ से हिलाया जिसने शिक्षा जैसे पवित्र माध्यम को भी कलंकित किया था। सुरक्षाबलों की यह सफलता सिर्फ एक मुठभेड़ नहीं, बल्कि आदिवासी इलाकों में उम्मीद की लौ है—अब शायद कोई बच्चा 'अ से अनार' और 'ब से किताब' पढ़ पाएगा।



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