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नाटक ‘स्वरूपा’ का प्रभावी मंचन: अंधभक्ति से बचें, शिक्षा अपनाएं

शहर में ‘स्वरूपा’ नाटक का भावपूर्ण मंचन, दर्शकों को मिला महत्वपूर्ण संदेश: रायपुर: शहर के संस्कृति भवन में आयोजित नाटक ‘स्वरूपा’ के मंचन ने...


शहर में ‘स्वरूपा’ नाटक का भावपूर्ण मंचन, दर्शकों को मिला महत्वपूर्ण संदेश:

रायपुर: शहर के संस्कृति भवन में आयोजित नाटक ‘स्वरूपा’ के मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। यह नाटक अंधविश्वास, महिला सम्मान, शिक्षा और सामाजिक कुरीतियों पर केंद्रित था। मंचन के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि अंधभक्ति से बचें और अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग करें। नाटक ने यह भी दिखाया कि शिक्षा कितनी जरूरी है, खासकर बेटियों के लिए, ताकि वे अपने भविष्य को संवार सकें और किसी भी तरह के अन्याय व शोषण से बच सकें।

भावनात्मक कथानक और सशक्त प्रस्तुति:

करीब 40 मिनट लंबे इस नाटक ने दर्शकों को झकझोर दिया। नाटक में दिखाया गया कि किस तरह अंधभक्ति और रूढ़ियों के कारण कई परिवार अपनी बेटियों को सही शिक्षा नहीं दे पाते और वे समाज में शोषण का शिकार हो जाती हैं। ‘स्वरूपा’ के मुख्य पात्र ने अपने संवादों और अभिव्यक्ति से यह संदेश दिया कि अगर बेटियों को शिक्षित किया जाए, तो वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं और खुद का बचाव कर सकती हैं।


दर्शकों की प्रतिक्रियाएं:

नाटक के समापन के बाद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से इसे सराहा। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस पहल की प्रशंसा की और कहा कि ऐसे नाटकों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलानी चाहिए।


संस्कृति और सामाजिक सुधार की दिशा में एक कदम:

‘स्वरूपा’ नाटक न केवल एक मंचीय प्रस्तुति थी, बल्कि यह समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी लेकर आया। यह नाटक बताता है कि हमें अंधभक्ति छोड़कर शिक्षित समाज की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि हमारी बेटियां आगे बढ़ सकें और समाज में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकें।

यह समाचार नाटक 'स्वरूपा' के मंचन और उसके सामाजिक संदेश को प्रभावी रूप से दर्शाता है। क्या आप इसमें कोई और जानकारी या विवरण जोड़ना चाहेंगे?


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