महासमुंद की 9 एम दवा कंपनी और अफसरों की मिलीभगत: 71 सैंपल फेल, फिर भी जारी है खरीदी: रायपुर : स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल उपकरण और दवा खरी...
महासमुंद की 9 एम दवा कंपनी और अफसरों की मिलीभगत: 71 सैंपल फेल, फिर भी जारी है खरीदी:
रायपुर : स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल उपकरण और दवा खरीदी से जुड़ी गड़बड़ियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें महासमुंद स्थित 9 एम फार्मास्युटिकल्स नाम की दवा कंपनी और अफसरों की साठगांठ उजागर हुई है।
दवा फेल, फिर भी जारी है सप्लाई:
जानकारी के मुताबिक, साल 2020 में इस कंपनी को टेंडर मिला था, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों में बुखार और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए दवाएं सप्लाई की गई थीं। लेकिन जब इन दवाओं के सैंपल की जांच की गई, तो 71 सैंपल फेल पाए गए। नियमानुसार, इतनी बड़ी संख्या में सैंपल फेल होने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन इसके बजाय, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने फिर से इसी कंपनी से नई दवाएं खरीद लीं।
बड़ी साजिश की आशंका:
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार का मामला है। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं था कि गुणवत्ता विफल होने के बावजूद उसी कंपनी को फिर से ठेका मिल जाए। इससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
क्या कहती हैं स्वास्थ्य नीतियां?
सरकार की दवा खरीदी नीति के मुताबिक, किसी भी कंपनी के उत्पाद अगर गुणवत्ता जांच में फेल होते हैं, तो उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। लेकिन यहां उल्टा हुआ—कंपनी को बचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई।
मामले की जांच की मांग:
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। आम जनता और विपक्षी दलों ने इस पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। यदि यह भ्रष्टाचार साबित होता है, तो इसमें शामिल अधिकारियों और दवा कंपनी पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कब तक?
सरकारी अस्पतालों में दवा और उपकरणों की खरीदी में लगातार घोटाले सामने आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक जारी रहेगा? अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और दोषियों पर कब तक शिकंजा कसती है।
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