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बस्तर में ‘रेड कॉल सेंटर’ की शुरुआत: हर प्रसव सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ी पहल, 30 दिनों तक मां-नवजात की डिजिटल निगरानी

 जगदलपुर, 14 अप्रैल 2026। बस्तर जिले में सुरक्षित मातृत्व को मजबूत आधार देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से ए...


 जगदलपुर, 14 अप्रैल 2026।

बस्तर जिले में सुरक्षित मातृत्व को मजबूत आधार देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से एक अभिनव पहल “रेड (रीचिंग एवरी डिलिवरी) कॉल सेंटर” की शुरुआत की गई है। सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में महारानी अस्पताल परिसर में इस अत्याधुनिक कॉल सेंटर का विधिवत शुभारंभ किया गया।

इस पहल की खास बात यह रही कि उद्घाटन किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी के बजाय एक नवजात शिशु की माता के हाथों कराया गया। यह पहल इस संदेश को मजबूत करती है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का केंद्र स्वयं माताएं ही हैं और उनकी सहभागिता से ही इन योजनाओं को वास्तविक सफलता मिल सकती है।

हरिक मांय, हरिक पिला’ अभियान से जुड़ेगा हर परिवार

“रेड कॉल सेंटर” को “हरिक मांय, हरिक पिला” (खुश मां, खुश बच्चा) अभियान के तहत संचालित किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जिले की प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

कॉल सेंटर विशेष रूप से उन महिलाओं पर फोकस करेगा जो गर्भावस्था के अंतिम चरण (7 से 9 माह) में हैं तथा उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आती हैं। प्रशिक्षित कॉल सेंटर प्रतिनिधि सप्ताह में एक से दो बार इन महिलाओं से सीधे फोन पर संपर्क करेंगे।

संस्थागत प्रसव को मिलेगा बढ़ावा

कॉल सेंटर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और संस्थागत प्रसव के लाभों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही, उन्हें उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने में मदद की जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य न केवल जागरूकता बढ़ाना है, बल्कि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों को न्यूनतम करना भी है।

प्रसव के बाद भी 30 दिनों तक सतत निगरानी

यह योजना केवल प्रसव तक सीमित नहीं है। प्रसव के बाद के पहले 30 दिन मां और नवजात शिशु के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कॉल सेंटर द्वारा नियमित फॉलो-अप किया जाएगा।

इस दौरान मां और शिशु की सेहत की जानकारी ली जाएगी, आवश्यक सलाह दी जाएगी तथा किसी भी प्रकार की जटिलता सामने आने पर तुरंत स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा। इससे प्रसव पश्चात होने वाली समस्याओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा।

स्वास्थ्य और तकनीक का प्रभावी समन्वय

“रेड कॉल सेंटर” स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग का उदाहरण है। डिजिटल माध्यम से निरंतर संपर्क और निगरानी के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जिले में कोई भी प्रसव असुरक्षित न रहे।

प्रशासन का लक्ष्य: शून्य जोखिम, स्वस्थ मातृत्व

बस्तर प्रशासन का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और हर मां-बच्चे को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

निष्कर्ष:

“रेड कॉल सेंटर” बस्तर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल साबित हो सकती है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।

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