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QR कोड के गुमनाम नायक: मसाहीरो हारा की प्रेरक कहानी

QR कोड के गुमनाम नायक: मसाहीरो हारा की प्रेरक कहानी हर जगह मौजूद वह छोटा-सा जादुई डिब्बा आज हमारी जेब में कैश हो या न हो, एक च...

QR कोड के गुमनाम नायक: मसाहीरो हारा की प्रेरक कहानी

हर जगह मौजूद वह छोटा-सा जादुई डिब्बा

आज हमारी जेब में कैश हो या न हो, एक चौकोर डिज़ाइन वाला छोटा-सा कोड हर काम को आसान कर देता है। सब्ज़ी की खरीदारी से लेकर मॉल में शॉपिंग तक—QR कोड अब हमारे आर्थिक व्यवहार का अनिवार्य हिस्सा है। लेकिन इसके पीछे किसका दिमाग था? और वह व्यक्ति दुनिया के सबसे अमीर लोगों में क्यों नहीं है? इसी प्रश्न को हाल में राज्यसभा सांसद और लेखिका **सुधा मूर्ति** ने भी उठाया, और वहीं से एक अनसुनी कहानी का दरवाज़ा खुलता है— **मसाहीरो हारा**, एक ऐसा नाम जिसने अरबों–खरबों की संभावित कमाई छोड़कर पूरी दुनिया को एक साझा तकनीक का उपहार दिया।

1. समस्या: बारकोड की सीमाएँ और फैक्ट्रियों की चुनौती

1994 में जापान की ऑटोमोबाइल कंपनी **डेंसो** में कार के पुर्ज़ों को ट्रैक करना मुश्किल होता जा रहा था। पारंपरिक बारकोड की तीन बड़ी समस्याएँ थीं:
  • डेटा क्षमता बहुत कम
  • एक पुर्ज़े पर कई बारकोड लगाने की मजबूरी
  • धीमी स्कैनिंग, जिससे उत्पादन प्रभावित
इन्हीं चुनौतियों से जूझ रहे इंजीनियर **मसाहीरो हारा** एक ऐसे समाधान की तलाश में थे जो तेज़ भी हो और अधिकतम जानकारी भी समेट सके।

2. प्रेरणा का क्षण: ‘गो’ बोर्ड गेम से जन्मा विचार

हारा का पसंदीदा बोर्ड गेम था **गो (Go)**। बोर्ड का काले-सफेद पत्थरों का दो-आयामी ग्रिड देखकर उनके मन में एक विचार कौंधा—
“अगर जानकारी को एक दिशा की जगह कई दिशाओं में फैलाया जाए, तो क्षमता और गति दोनों बढ़ जाएगी।”
यही वह ‘अहा’ क्षण था जिसने QR कोड की नींव रखी।

3. समाधान: क्विक रिस्पांस (QR) कोड का जन्म

लंबी मेहनत के बाद टीम ने विकसित किया— **Quick Response Code**, एक ऐसा प्रारूप जो बारकोड से कहीं अधिक शक्तिशाली था।
फ़ीचर बारकोड QR कोड
गति धीमा 10 गुना तेज़
डेटा क्षमता बहुत कम सैकड़ों गुना अधिक
विश्वसनीयता क्षतिग्रस्त होने पर अपठनीय फटने या गंदा होने पर भी पठनीय
यह सिर्फ एक तकनीकी सुधार नहीं था, बल्कि सूचना प्रसंस्करण की दुनिया में क्रांति थी।

4. निस्वार्थ निर्णय: मानवता को समर्पित एक आविष्कार

दुनिया के अधिकतर आविष्कार पेटेंट और रॉयल्टी आधारित होते हैं। हारा और डेंसो चाहते तो QR कोड को अरबों डॉलर की कमाई का जरिया बना सकते थे। लेकिन उन्होंने इसे **ओपन सोर्स** कर दिया—सभी के लिए, हमेशा के लिए **मुफ़्त**।
“मैं चाहता हूं कि यह तकनीक पूरी दुनिया में काम आए।” — मसाहीरो हारा
अगर वे प्रति स्कैन सिर्फ 10 पैसे भी लेते, तो आज वे दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में होते। लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत लाभ से ऊपर मानव कल्याण को रखा।

5. वैश्विक प्रभाव: फैक्ट्री से मोबाइल तक और महामारी तक

2000 के बाद, कैमरे वाले मोबाइल आने के बाद QR कोड हर घर का हिस्सा बन गया। कोविड-19 महामारी ने इसे जीवन का अनिवार्य साधन बना दिया—कॉन्टैक्टलेस भुगतान की वजह से इसकी लोकप्रियता विस्फोटक रूप से बढ़ी। आज QR कोड हर जगह है:
  • गाँव के रेहड़ी तक डिजिटल भुगतान
  • अस्पताल रिपोर्ट और रेलवे टिकट
  • रेस्टोरेंट मेन्यू से लेकर वेब लिंक तक
यह प्रभाव किसी एक कंपनी का नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी व्यक्ति के निस्वार्थ निर्णय का परिणाम है।

6. असली सफलता का अर्थ

हारा आज भी विनम्रता से कहते हैं:
“मैं कोई महान आविष्कारक नहीं। मैंने सिर्फ एक समस्या देखी और उसका समाधान किया।”
सुधा मूर्ति कहती हैं— **सामाजिक नवप्रर्वतक सिर्फ तकनीक नहीं बनाते, समाज को बेहतर बनाते हैं।** मसाहीरो हारा ने साबित किया कि सफलता का असली पैमाना बैंक बैलेंस नहीं, **बल्कि वह प्रभाव है जो आपका काम मानवता पर छोड़ता है।**

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